घर से निकलने से पहले शाकिरा ने की थी पिता से फोन पर बात
पीलीभीत। हादसे में पांच लोगों की मौत के बाद जिला अस्पताल पहुंचे हर शख्स की आंखें नम थीं। किसी को अपने बेटे को खोने का गम था तो कोई अपने बेटा-बहू को याद कर रो रहा था। इन्हीं लोगों मेंं शामिल बुजुर्ग पिता का कहना था कि अगर बेटी शाकिरा ने बात मान ली होती तो उसकी और दामाद की जान बच जाती।
हरिद्वार नेशनल हाईवे पर हुए हादसे की सूचना मिलते ही हर कोई पहले घटनास्थल और फिर जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। जिला अस्पताल में काफी संख्या में लोग पहुंचे। मोर्चरी से लेकर आपातकालीन कक्ष तक सिर ही सिर नजर आ रहे थे। थाना जहानाबाद क्षेत्र के गांव चका निवासी अबरार ने बताया कि बृहस्पतिवार को नमाज के बाद उनकी पुत्री शाकिरा का फोन आया। कहा कि वह आज नवाबगंज रिश्तेदारी में ईद मिलने जाने वाली है। पिता ने उसे मायके होकर जाने की बात कही, लेकिन वह नहीं मानी।
कहा- गांव से अन्य लोग भी जा रहे हैं। वहां से वापस आते समय वह घर होकर जाएगी। उसे यह नहीं पता था कि वह नवाबगंज पहुंच ही नहीं पाएगी और परिजनों को उसकी मौत की खबर सुनने को मिलेगी।
रोते हुए अबरार ने कहा कि लगभग एक घंटे के बाद फिर एक फोन आया, लगा कि पुत्री ने मायके होकर जाने की बात कहने के लिए फोन किया है, लेकिन उस फोन ने उनके होश उड़ा दिए। हादसे की जानकारी के बाद पूरा परिवार घटनास्थल के लिए रवाना हो गया ।
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अगल-बगल हैं अरबाज-साहिब के आवास
गांव परेवा वैश्य में रहने वाले अरबाज और साहिब सुबह ईद की खुशी मनाते हुए घर से निकले थे। इनके साथ आकिब भी था। थोड़ी देर बाद मिली सूचना ने परिजनों को बदहवास कर दिया। परिवार के सभी सदस्य बिलखते हुए हरिद्वार हाईवे पहुंचे। अरबाज और साहिब का घर अगल-बगल में हैं। जबकि आकिब ग्राम विलाई पसियापुर का रहने वाला था। तीनों अलग-अलग स्थानों पर काम करते थे। हादसे में तीन युवकाें की मौत से दो गांवों में मातम छा गया।