पूरनपुर। धान खरीद में इस बार भी पिछले साल की तरह औने-पौने दामों में खरीदे गए धान को सरकारी खरीद में दिखाकर खरीद का लक्ष्य भले ही पूरा कर लिया जाए, पर सच यह है कि किसानों को सरकारी व्यवस्था पसंद नहीं आ रही है। यही कारण है कि किसान सीधे अपना धान लेकर मिल या आढ़तों पर पहुंच रहे हैं। उधर, राइस मिल वाले धान को 1800-1900 रुपये में खरीद रहे हैं।
सरकारी केंद्रों पर धान तुलवाने से पहले किसानों को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके बाद संबंधित किसान के कागजातों का सत्यापन किया जाता है। खरीद केंद्रों पर पहुंचने पर धान की सफाई, धान गीला होने की बात करते हुए उसे लेने से इन्कार कर दिया जाता है। सब कुछ ठीक होेने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं कि रकम खाते में कब आएगी।
यहां बता दें कि शासन के निर्देश हैं कि धान खरीदने के 72 घंटे के भीतर ही किसान का भुगतान उसके खाते में हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। किसानों का कहना है कि इन्हीं झंझटों से बचने के लिए वह अपना धान आढ़तों या मिलों में ले जा रहे हैं। मिल वाले 1800 रुपये और पंजीकरण के लिए कागज देने, समय आने पर खरीद केंद्र पर अंगूठा लगाने की शर्त पर 1900 तक में धान की खरीद कर रहे हैं। यहां किसानों को पूरी रकम एक साथ तत्काल दी जा रही है।
ऐसे भी हो रहा है खेल
राइस मिलर्स को सरकार की ओर से इस बार धान खरीद में छूट दी गई है। कहा गया है कि किसान का धान निर्धारित मूल्य पर खरीद कर उसके खाते में भुगतान किया जाए। खरीदे गए धान की सूचना समय पर मंडी समिति को दी जाए। इससे उनको मंडी शुल्क मेंं भी छूट का प्रावधान रखा गया है। मगर मिलर्स कम दाम पर किसानों का धान खरीद रहे हैं। भुगतान दिखाकर मंडी शुल्क में भी छूट ले रहे हैं।
किसान बोले- मिल वाले दे देते हैं तुरंत पूरा भुगतान
राइस मिलर को धान की बिक्री करने पर वह तत्काल भुगतान दे देते हैं, जबकि खरीद केंद्र पर तीन दिन में भुगतान आने की बात तो कही जाती है लेकिन भुगतान कब खाते में आएगा, इसका कुछ पता नहीं रहता। - सचिन पांडेय, चांदूपुर
चावल के दाम उछाल पर होने से इस बार धान का रेट बाजार में ठीक मिल रहा है। सरकार ने भी धान मिलर्स को देने की छूट दे रखी है। यहां कागजों को दिखाने आदि का भी झंझट नहीं है। - गुरविंदर सिंह, मुझा
पूरनपुर मंडी समिति में क्रय केंद्र पर एक किसान का तौला जा रहा धान । संवाद
पूरनपुर मंडी समिति में क्रय केंद्र पर एक किसान का तौला जा रहा धान । संवाद