गुरुद्वारे में सहज पाठ का भोग पड़ा गया जो नवंबर माह से शुरू हुआ था। भाई पाल सिंह द्वारा अरदास की गई। अमृतसर से आई बीबी बलविंदर कौर खालसा के जत्थे द्वारा गुरु की महिमा की बखान किया गया। जरनैल सिंह लहरी, अमर सिंह साजन ने कविताएं सुनाई। समागम के दौरान संकल्प लिया गया कि वह गुरु की भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले को दान नहीं देंगे। इस दौरान गुरू का अटूट लंगर भी चला। जिसमें क्षेत्र के अलावा आसपास की संगत ने बड़ी तादाद में भाग लिया। इस मौके पर जागीर सिंह, गुरमेल सिंह, अमरजीत सिंह, सुच्चा सिंह, ज्ञान सिंह, साहब सिंह, मंगा सिंह, बाबा निंदर सिंह, पलविंदर सिंह, सतनाम सिंह, त्रिलोचन सिंह, सुखचैन सिंह, बीबी वचन कौर आदि मौजूद रहे।