माधोटांडा कस्बे में यात्रियों के इंतजार में खड़े टेंपो।संवाद
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व स्थित होने के कारण पर्यटन स्थल के रूप में पहचान रखने वाले माधोटांडा क्षेत्र के लोग डग्गामार वाहनों के सहारे जोखिम भरा सफर तय करने को मजबूर हैं। अधिकतर मार्गों पर डग्गामार वाहन ही संचालित किए जा रहे हैं। पूरनपुर-माधोटांडा मार्ग पर तो यात्रा के लिए टेंपो ही एकमात्र साधन हैं। इससे क्षेत्र के लोग परेशान हैं, लेकिन अफसर जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
माधोटांडा कस्बे की आबादी 50 हजार है। इसके साथ ही आसपास के करीब छह गांवोंं के लोग भी जरूरी काम के लिए 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर पूरनपुर जाते हैं। रोजाना हजारों लोगों का पूरनपुर आना-जाना होता है। स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने के लिए भी अधिकतर विद्यार्थियों को पूरनपुर जाना पड़ता है। जो इसी मार्ग से आते-जाते हैं।
इस मार्ग पर कई सालों से एक भी रोडवेज की बस संचालित नहीं हो रही है। इसका फायदा डग्गामार वाहन संचालक उठाते हैं। इस मार्ग पर इस समय 20 से अधिक टेंपो संचालित हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि टेंपो संचालक मनमाना किराया वसूलने के बाद भी यात्रियों को सुविधा नहीं दे पाते। ऐसे में यात्रा जोखिम भरी रहती है।
इस मार्ग पर गर्मी के दिनों में शाम सात बजे के बाद कोई वाहन नहीं मिलता तो सर्दियों में शाम पांच बजते ही वाहन नदारद हो जाते हैं। जिससे यात्रियों को परेशानी होती हैं। हर साल टेंपो पलटने से यात्रियों के घायल होने की घटनाएं भी होती हैं।
पर्यटन स्थल घूमने आने वाले भी होते हैं परेशान
माधोटांडा क्षेत्र में चूका के अलावा बाइफरकेशन, सप्तसरोवर और शारदा सागर डैम भी है। ऐसे में इन स्थलों का भ्रमण करने के लिए अक्सर दूरदराज से लोग आते हैं। ऐसे में अस्थायी साधनों से आने वाले सैलानियों को पूरनपुर-माधोटांडा रोड पर असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
पूरनपुर से माधोटांडा होते हुए खटीमा तक परिवहन निगम ने रूट सर्वे कर लिया था। यहां पर जल्द बसों का संचालन किया जाएगा। परिवहन विभाग की ओर से नियमित रूप से इस क्षेत्र में चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। अगर कोई डग्गामारी कर रहा है तो सख्त कार्रवाई होगी।
-वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ