पीटीआर बनने के बाद रोजगार के बढ़े अवसर
पीटीआर बनने से पहले यहां हालात बिलकुल जुदा थे। जंगल से सटे इलाकों में न कोई ढाबा न ठहरने के इंतजाम थे। 2014 में पीटीआर बना। 2018 से यहां विकास होना शुरू हुआ। पिछले पांच सालों में करीब पांच सौ लोगों को रोजगार मिला है। इनमें जंगाली सफारी चालक, गाइड, होटल व ढाबे पर काम करने वाले, होमस्टे की सुविधा देने वाले लोग शामिल हैं। रोजगार के लिहाज से ढाबे और होटल ही खुले हैं। साथ ही 40 स्थानीय लोगों को गाइड के रूप में रोजगार मिला। इनमें एक युवती भी शामिल है।
होमस्टे और कैंटीन से लोगों को मिला रोजगार
पर्यटन स्थल के चलते जनपद में जंगल सीमा से सटे मुस्तफाबाद, बराही और सेल्हा आदि गांव में पीटीआर प्रशासन के सहयोग के होमस्टे की सुविधा शुरू की गई। होमस्टे के तहत ग्रामीणों ने सैलानियों के ठहरने के इंतजाम किए हैं। इसके लिए 15 सौ से लेकर दो हजार का 24 घंटे रुकने का किराया निर्धारित किया गया है। पांच होम स्टे से करीब 50 लोगों को रोजगार मिला है। इसमें सबसे बड़ा होम स्टे अर्थहोम है। इसके अलावा चूका, मुस्तफाबाद, सप्त सरोवर में कैंटीन खोली गई है। इसमें करीब 50 लोग काम कर रहे हैं।