पीलीभीत। सरकारी राशन की दुकानों को अन्नपूर्णा भवनों में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए 75 में से आठ भवन बनकर तैयार हैं, लेकिन विभागीय हीलाहवाली की वजह से हैंडओवर नहीं हो पा रहे हैं।
यही नहीं 12 भवनों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंचकर बजट न होने की वजह से अटक गया है तो शेष 55 भवनों के निर्माण में भी कोई प्रगति नहीं हुई है। केंद्र सरकार की ओर से पारदर्शिता रखने के लिए भवनों का निर्माण मनरेगा के तहत शुरू किया गया था। तय किया गया था भवनों में कोटेदार राशन भंडारण के साथ सीएससी (कम्यूनिटी सर्विस सेंटर) का भी संचालन करेंगे। जिसका लाभ आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलेगा।
बता दें कि शासन स्तर से पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय योजना के तहत राशन का वितरण कराया जाता है, जो भी कोटेदार हैं, वे या तो अपने घर, निजी जगह या फिर किराये की दुकान लेकर राशन का वितरण करते हैं। इन दुकानों में इतनी जगह नहीं होती, जहां कार्डधारक सही ढंग से खड़े भी हो सकें। कार्डधारकों को दुकान के बाहर खड़े होकर ही राशन लेना पड़ता है। इससे उन्हें परेशानी होती है।
इसके अलावा कई कोटेदारों की दुकानें संकरी गलियों में होने से वहां तक राशन से भरे ट्रक नहीं पहुंच पाते हैं। इससे उन्हें भी दिक्कत आती है। यही नहीं कई बार राशन विक्रेता दुकानों को इधर से उधर शिफ्ट कर देते हैं। इसकी वजह से भी उपभोक्ताओं को दुकानों को ढूंढने के लिए कई बार भटकना पड़ता है। इसी के दृष्टिगत अन्नपूर्णा भवनों के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
7.83 लाख रुपये आएगा एक भवन के निर्माण पर खर्चा
एक अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिए शासन की ओर से करीब 7,83000 रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। जिले में जुलाई तक सभी भवनों का निर्माण पूरा कर जिला आपूर्ति विभाग को हैंडओवर किया जाना था पर ऐसा नहीं हो सका।
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एक ही छत के नीचे मिलेगा सारा सामान
अन्नपूर्णा भवनों के निर्माण के बाद एक ही छत के नीचे 40 प्रकार की घरेलू उपयोग की वस्तुएं मिलेंगी। इसमें पांच किलो के गैस सिलिंडर से लेकर आटा, दाल, चावल, नमक, चीनी, तेल, साबुन आदि उपलब्ध रहेंगी।
मामले को दिखाया जाएगा। वर्तमान में मनरेगा में बजट नहीं है। इसकी वजह से निर्माण नहीं हो पा रहा है। संबंधित अधिकारियों को भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा।
-संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी