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Pilibhit News: जमीन नहीं मिलने के कारण हाईटेक पुस्तकालयों का नहीं हो सका निर्माण

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पूरनपुर के मढईया लालपुर में संचालित हाईटेक पुस्तकालय । स्रोत - विभाग
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पीलीभीत। युवाओं को गांवों में ही पुस्तकालय उपलब्ध कराने का दावा अब तक पंचायतीराज विभाग पूरा नहीं कर पाया है। जिले में कई गांवों में विभाग जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पाया है। इसकी वजह से पुस्तकालयों का निर्माण नहीं हो पाया है। बता दें कि जिले के 51 गांवों में पुस्तकालयों का निर्माण कराया जाना है, जिसमें 10 स्थानों पर निर्माण शेष है।
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शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के भी तमाम युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को तमाम किताबों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रशासन की ओर से जिले भर के 51 गांवों में हाईटेक पुस्तकालय का निर्माण शुरू कराया जाना था।
शुरुआती दौर में जिले की ऐसी ग्राम पंचायतों का चयन किया गया, जहां चार हजार से अधिक की आबादी है। इन ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि से ये पुस्तकालय बनवाए जाने थे। कुछ गांवों में पुस्तकालयों का निर्माण करा भी दिया गया, लेकिन करीब 10 गांव ऐसे रहे जहां अब तक जमीन का अधिग्रहण न होने के कारण पुस्तकालयों का निर्माण नहीं हो सका।
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इन स्थानों को किया गया था चिह्नित
पीलीभीत जिले में कुल सात ब्लॉक हैं। सभी ब्लॉकों में सबसे अधिक 23 पुस्तकालय पूरनपुर की झोली में आए। वहीं अमरिया में नौ, मरौरी में आठ, बीसलपुर में पांच और ललौरीखेड़ा-बिलसंडा-बरखेड़ा में दो-दो पुस्तकालय बनवाने के लिए निर्देश दिए गए।


इन स्थानों पर हाे चुका है निर्माण
जिला प्रशासन की ओर से कुछ स्थानों पर जैसे शेरपुर कला, मटईया लालपुर, धरअंगदपुर, बिलसंडा, चंदिया हजारा, सिमरिया ताल्लुका, अजीतपुर बिल्हा में पुस्तकालयों का संचालन किया जा रहा है। अन्य स्थानों पर पुस्तकालयों का निर्माण कार्य जारी है।

1.25 लाख रुपये बजट किया गया था निर्धारित
प्रत्येक पुस्तकालय के लिए 1.25 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें पुस्तकालय का निर्माण, कक्षा एक से 12 तक एनसीईआरटी की पुस्तकें और अन्य भर्ती परीक्षाओं की पुस्तकों को रखवाया जाना है।


51 गांवों को पुस्तकालय बनाने के लिए चयनित किया गया था। अभी बहुत से गांवों में जमीन न मिलने के कारण पुस्तकालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर संचालन शुरू हो गया है।
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-सतीश कुमार, जिला पंचायती राज अधिकारी
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