जिला अस्पताल में इएनटी कक्ष में खाली पड़ी डॉक्टर की कुर्सी। संवाद
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पीलीभीत। न्यूरिया निवासी साईन कई दिनों से कान की समस्या से परेशान हैं। प्राइवेट अस्पताल के महंगे इलाज का बोझ नहीं उठा सकतीं। इसलिए सोमवार को जिला अस्पताल आई थीं। पर्चा बनवाने के बाद ईएनटी कक्ष में पहुंची, लेकिन चिकित्सक नहीं बैठे मिले। मायूस होकर वह लौट गईं। साईन 50 रुपये खर्च कर जिला अस्पताल तक पहुंची थीं। वापस लौटने में खर्च दोगुना हो गया। कुछ ऐसा ही न्यूरिया की समा के साथ भी हुआ। उसे भी डॉक्टर नहीं मिले।
60 वर्षीय गोदावरी आंखों की समस्या से परेशान होकर बरहा गांव से अस्पताल पहुंची थी। लाइन में लगकर पर्चा भी बनवाया, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल सके। कारण पूछने पर पता चला की डॉक्टर साहब ऑपरेशन में व्यस्त हैं। सोमवार को फीजिशियन भी ओपीडी में नहीं बैठे, कारण यह था कि उनकी रात्रि ड्यूटी लगी थी। हड्डी रोग चिकित्सक डॉ रंजीत सक्सेना भी का चैंबर भी खाली था। पता चला वह कैंप में गए हुए हैं।
यह हाल है जिला अस्पताल का। सबसे ज्यादा दिक्कत बाल रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन के स्थानांतरण के बाद हुई है। इन दोनों विभागों में मरीजों की ओपीडी सबसे अधिक होती है। स्थिति यह है कि मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर के अभाव में इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है या फिर निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ रहा है। जिन पांच डॉक्टरों के तबादले हुए हैं। उनमें फिजिशियन और ईएनटी रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। अस्पताल में महज एक फिजिशियन बचे हैं। 26 डॉक्टरों के सापेक्ष इस वक्त केवल 11 डॉक्टरों के भरोसे जिला अस्पताल चल रहा है।
रोजाना आते 300 से ज्यादा मरीज, अब आ रहे 70-80
जिला अस्पताल के बाल रोग और ईएनटी विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज आते हैं। डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद यह संख्या 70 से 80 के बीच सिमटकर रह गई है। अन्य मरीज बिना इलाज कराए ही लौट जा रहे हैं। क्योंकि बाल रोग के डॉक्टर शरद चंद गुप्ता कैंसर पीड़ित हैं। उन्हें बोलने में परेशानी है। ओपीडी में बैठ तो रहे लेकिन मरीजों को डॉ. नीता सक्सेना ही देखती हैं। मौजूदा समय में एक चिकित्सक डॉ पीके शर्मा ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं। सोमवार को यहां मरीजों की भीड़ लगी रही।