पीलीभीत/ गजरौला। बीमारी आने का कोई दिन निर्धारित नहीं होता, लेकिन सुहास के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक सिर्फ रविवार को आते हैं। ऐसे में यहां मरीजों की लाइन लग जाती है, अन्य दिनों में मरीजों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
बृहस्पतिवार को भी यहां चिकित्सक कक्ष पर ताला लगा रहा। न मरीज थे और न ही चिकित्सक। यहां पर मात्र टीकाकरण का काम हो रहा था। बता दें कि अस्पताल बनने के तीन साल बाद भी यहां पर अब तक किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। जिसके चलते मरीजाें को लौटना पड़ता है। यहां स्थिति इतनी खराब है कि चिकित्सक के अभाव में लोगों ने आना ही बंद कर दिया है।
पांच हजार की आबादी वाले सुहास गांव में सरकारी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मार्च 2021 को सांसद वरुण गांधी ने 1.88 करोड़ रुपये की लागत से बने अस्पताल का लोकार्पण किया था। लोकार्पण के बाद यहां पर स्टाफ तैनात करने के लिए भी कहा था, लेकिन तीन साल बाद भी अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट सहित पूरा स्टाफ तैनात नहीं हो सका।
शासन स्तर पर कई बार जिले से पत्राचार भी हुआ, लेकिन चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी। हालत यह है कि अस्पताल में मात्र टीकाकरण और प्रसव का कार्य ही शुरू हो सका है। किसी चिकित्सक की तैनाती न होने से उनके कक्ष पर ताला लगा रहता है। इससे मरीजों को बरखेड़ा सीएचसी या फिर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
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अस्पताल का विधिवत संचालन कराए जाने के लिए चिकित्सकों की तैनाती की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नया अस्पताल बनने के बाद भी क्षेत्र लोगों को चिकित्सा सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा।
- रूबी देवी, ग्राम प्रधान
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जिले में चिकित्सक की संख्या जरूरत से काफी कम है। रोस्टर के अनुसार चिकित्सालय में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। सप्ताह में यहां सिर्फ रविवार को चिकित्सक व फार्मासिस्ट को भेजा जाता है।
- डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
गांव सुहास स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बंद पड़ा कक्ष । संवाद