बरखेड़ा। क्षेत्र के गांव मुसेपुर जयसिंह में भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक किशोरी मंगेश ने गोवर्धन पर्वत पूजा प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में सभी बृजवासी इंद्रदेव की पूजा करते थे। जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से इंद्र की पूजा बंद कराकर गोवर्धन पर्वत की पूजा के आदेश दिए। इससे चिढ़कर इंद्र ने बृज क्षेत्र में भयंकर मूसलाधार बरसात शुरू कर दी। तब गांव वाले श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर सभी क्षेत्रवासियों को उसके नीचे छिपा लिया। तब से पूरे बृज क्षेत्र के लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। कथा के अंत में अधर्मी कंस व श्रीकृष्ण के मध्य युद्ध और कंस वध के कथा के साथ समापन किया। संवाद