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रावण की भूमिका निभाते पिता की जान गई तो बेटे ने संभाली विरासत

सार

रामलीला मेला नजदीक आते ही आज भी लोगों को वह पल याद आ जाता है, जब 35 साल पहले बीसलपुर में लीला मंचन के दौरान असलियत में गंगा विष्णु उर्फ कल्लू ने भगवान राम के स्वरूप का बाण लगते ही प्राण त्याग दिए थे, पर यह विराम नहीं था। बाण लगते ही वह जमीन पर गिर पड़े, इसके बाद खड़े नहीं हो सके। आज भी अपने पिता की मूर्ति के आगे नमन करने के बाद ही दिनेश अपना अभिनय शुरू करते हैं।--रावण और लंकेश पड़ गई है पहचानदिनेश बताते हैं कि पिछले 35 सालों से वह रामलीला में रावण की भूमिका निभा रहे हैं।
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बीसलपुर के रामलीला मैदान में लगी गंगा विष्णु उर्फ कल्लू की मूर्ति। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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विस्तार
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पीलीभीत। रामलीला मेला नजदीक आते ही आज भी लोगों को वह पल याद आ जाता है, जब 35 साल पहले बीसलपुर में लीला मंचन के दौरान असलियत में गंगा विष्णु उर्फ कल्लू ने भगवान राम के स्वरूप का बाण लगते ही प्राण त्याग दिए थे, पर यह विराम नहीं था। गंगा विष्णु की मृत्यु के बाद 60 वर्ष के हो चुके उनके पुत्र दिनेश रस्तोगी आज तक विरासत में मिली रावण की भूमिका को आज तक शिद्दत से निभाते चले आ रहे हैं।
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बीसलपुर के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी गंगा विष्णु ने 1941 में गांव चौसरा निवासी मोती महाराज से प्रेरणा लेकर रामलीला में रावण का किरदार निभाना शुरू किया। लीला मंचन के दौरान उनकी भूमिका की जमकर तारीफ होती थी। आज से 35 साल पहले 1987 में रावण वध लीला मंचन के दौरान जब दर्शकों से मैदान खचाखच भरा हुआ था, डीएम और एसपी भी मौजूद थे। लीला मंचन के दौरान रावण वध के लिए भगवान राम के स्वरूप ने रावण वेशधारी गंगा विष्णु पर बाण चलाया। बाण लगते ही वह जमीन पर गिर पड़े, इसके बाद खड़े नहीं हो सके। काफी देर तक तो लोग यही समझते रहे कि गंगा विष्णु अभिनय कर रहे हैं। काफी देर बाद भी जब वह नहीं उठे तो उन्हें उठाकर डॉक्टर को दिखाया गया तो उन्होंने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। पिता की मौत के बाद अगले साल 1988 से यह दायित्व उनके पुत्र दिनेश रस्तोगी ने संभाला और रावण की भूमिका निभाना शुरू की और तब से आज तक वह हर साल रावण का किरादर निभाते चले आ रहे हैं।
दिनेश रस्तोगी ने बताया कि रामलीला मंचन के दौरान कितना भी जरूरी काम हो, वह टाल देते है। किरदार जरूर निभाते हैं
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गंगा विष्णु की याद में लगी है उनकी मूर्ति
गंगा विष्णु की मृत्यु के बाद नगर के लोगों ने माना कि यह कोई साधारण मृत्यु नहीं है। श्रीराम की कृपा है। इसके बाद रामलीला स्थल पर जनसहयोग से गंगा विष्णु की मूर्ति लगाई गई। आज भी अपने पिता की मूर्ति के आगे नमन करने के बाद ही दिनेश अपना अभिनय शुरू करते हैं।
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रावण और लंकेश पड़ गई है पहचान
दिनेश बताते हैं कि पिछले 35 सालों से वह रामलीला में रावण की भूमिका निभा रहे हैं। शुरू में कुछ दिक्कत आई थी। रिहर्सल करना पड़ता था, लेकिन अब तो डायलॉग याद हो गए हैं। नगर में लोग उन्हें ‘लंकेश’ या फिर ‘रावण’ कहकर पुकारते हैं तो उन्हें बुरा नहीं लगता। उनकी सराफ की दुकान है, जो नगर में ‘लंकेश’ के नाम से जानी जाती है। दिनेश बताते हैं कि वह भगवान शंकर की पूजा करते हैं। उनके अलावा परिवार में कोई अभिनय नहीं करता। कहते हैं-जब तक जिंदा हूं रावण की भूमिका निभाता रहूंगा।

बीसलपुर रामलीला मेले में रावण की भूमिका निभाते दिनेश रस्तोगी। फाइल फोटो- फोटो : PILIBHIT

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