शावक के भ्रम में पकड़ी जंगली बिल्लियां
जंगल से निकली बाघिन के साथ शावक होने की सूचना पर पहले ग्रामीणों ने उसकी घेराबंदी की, बाद में वनकर्मियों के सहयोग से दो जानवरों को पकड़ा। पहले माना गया कि ये शावक हैं लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने दोनों को शावक न होकर जंगली बिल्लियां बताया। इसके बाद दोनों को पुन: उसी स्थान पर छोड़ दिया गया। शावक पकड़े जाने की सूचना से सैकड़ों की संख्या में लोग पहले घटना स्थल और बाद में थाने के बाहर जमे रहे। थाना क्षेत्र के डगा निवासी अहमद खां की बाघिन के हमले में मौत के बाद से क्षेत्र के लोगों में दहशत कम नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार दोपहर डगा निवासी बाबू खां ने खारजा नहर की ओर से दो जानवरों को एक खेत में खेलते देखा। उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले बाघिन भी उधर से गुजरी थी। आशंका जताई कि दोनों जीव बाघ के बच्चे हैं। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए। डिप्टी रेंजर वजीर हसन भी वाचरों के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक दोनों बच्चे लकड़ियों के ढेर में घुस गए। वनकर्मियों ने ग्रामीणों के सहयोग से लकड़ियां हटाई तो दो जीवन वहां दिखे। डिप्टी रेंजर ने दोनों को किसी तरह बचाकर माधोटांडा थाने पहुंचाया लेकिन भीड़ थाने पर भी पहुंच गई। शावक के पकड़े जाने की आशंका पर सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार भी माधोटांडा थाने पहुंचे। जांच में उन्होंने दोनों को शावक न होकर जंगली बिल्लियां होना पाया। इसके बाद भीड़ कम होने पर देरशाम दोनों बिल्लियों को पुन: खेत में छोड़ दिया गया।
बाघ और बिल्ली एक ही प्रजाति के पशु हैं। ग्रामीणों ने खेत में घूम रहे जंगली बिल्ली के बच्चों को शावक समझ लिया था। बाद में दोनों को छोड़ दिया गया।
- आदर्श कुमार, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी