सुनगढ़ी क्षेत्र के रूपपुर कमालु गांव के 30 वर्षीय अमित शर्मा पुत्र तेज बहादुर का शव बरेली के बहेड़ी थाना क्षेत्र में एक खेत में पड़ा मिला। उसकी हत्या कर शव फेंका गया है। एक अन्य युवक का शव भी साथ में है। रविवार दोपहर साढ़े तीन बजे वह किच्छा के किसनपुर मोहल्ले में बहन सीमा की ससुराल जाने को घर से निकला था। परिवारवालों से बातचीत के बाद हत्या को लेकर चार अज्ञात लोग संदेह के घेरे में हैं। हत्याकांड का खुलासा करने के लिए पुलिस का उन चार लोगों को तलाशना भी बेहद जरूरी होगा।
मृतक अमित की मां नत्थोदेवी ने बताया कि रात करीब साढ़े आठ बजे फोन पर बात हुई थी, जिसमें उसने घर से निकलने के बाद से ही चार अज्ञात लोगों द्वारा पीछा करने की बात कही थी। वह बहेड़ी में बस का इंतजार कर रहा था। इस पर मां ने अमित को किसी अन्य साधन से जल्दी बहन के घर पहुंचने की सलाह दी थी। दांबारा रात में ही सवा दस बजे अमित की कॉल आई, लेकिन सिर्फ हैलो होते ही फोन कट गया। घर वाले फोन लगाते रहे। इसके बाद भी कॉल कनेक्ट नहीं हो सकी थी। इसके बाद से ही रातभर घरवाले परेशान थे। सुबह तड़के ही उसकी मौत की सूचना मिल गई। ऐसे में चार अज्ञात लोगों पर हत्या का शक गहराने लगा है।
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आठ माह की गर्भवती है चंचल
अमित की शादी पांच साल पहले बरेली के झोरपुर निवासी चंचल से हुई थी। उसकी पत्नी चंचल आठ माह की गर्भवती है। जिसको लेकर अमित के परिवार में खुशनुमा माहौल था। वह भी पिता बनने को लेकर खुश रहता था। अफसोस परिवार में खुशियां आने से पहले ही गम का पहाड़ टूट पड़ा। चंचल का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मुकदमे के विवाद में तो नहीं हुई हत्या?
अमित के परिवारवालों ने बताया कि उसके ऊपर छह साल पहले सुनगढ़ी क्षेत्र की एक महिला ने रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया था। इसमें न्यायालय से वह बरी हो गया था। इसके बाद से महिला के परिवारवालों से उसकी रंजिश चल रही थी। मां नत्थोदेवी ने बताया कि इसको लेकर आए दिन महिला के घरवाले घर पर आकर पथराव किया करते थे। कई बार अमित को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। ऐसे में पूरे परिवार का शक इसी रंजिश को लेकर गहराया हुआ है।
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चार भाई-बहनों में बड़ा था अमित
अमित गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था। पिता तेज बहादुर का स्वास्थ्य खराब रहता है। उसका एक छोटा भाई दीपक है। इसके अलावा दो बहनें सीमा और रेनू हैं। मृतक चारों में सबसे बड़ा था। वह दिल्ली में सिलाई का काम करता था। पिछले दिनों काम छोड़कर वापस घर आ गया था। कोई न कोई काम कर परिवार को आर्थिक मदद पहुंचाता रहता था। गांव के लोगों से भी उसका मेलजोल अच्छा था। उसकी हत्या की खबर पहुंचते ही गांव के तमाम लोग परिवार को ढांढस बंधाने जमा रहे।