अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार ने शहर के तीन वर्ष पुराने बहुचर्चित सईदा
बी हत्याकांड के आरोपी रानू उर्फ सरताजवली को दोषी पाकर आजीवन कारावास और
26 हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। जुर्माने की आधी रकम मृतका के वारिसों
को दी जाएगी।
शहर के मोहल्ला मुनीर खां निवासी अब्दुल मजीत ने 22 अगस्त
2012 को शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसके अनुसार उसका भतीजा
तस्लीम शराब पीकर घर आ गया। उसने भतीजे को डांट लगाई। इतने में ही भतीजे का
दोस्त शहर के मोहल्ला मुनीर खां निवासी रानू उर्फ सरताजवली हाथ में छुरी
लेकर आया।
गालियां देते हुए बोला के मेरे दोस्त तस्लीम को तुम लोगों ने
क्यों बंद किया है। छुरी लहराता हुआ वादी पर हमला कर दिया। उसे बचाने आई
पत्नी सईदा बी को भद्दी गालियां देते हुए जान से मारने की नीयत से सईदा बी
के पेट में छुरा मार दिया। मौके पर सईदा का बेटा खालिद मियां, मोहल्ले के
आरिफ आदि आ गए।
तब हमलावर छुरी का भय दिखाकर भाग गया। पुलिस ने मृतका सईदा
की का पंचनामा भरकर शव का अंतिम परीक्षण कराया। शासकीय अधिवक्ता काजी
रिफाकत हुसैन फरहान और मृतका पक्ष के विशेष अधिवक्ता गुफरान अली रजवी ने
वादी व गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कर ाए। मामले की सुनवाई के बाद अपर
सत्र न्यायाधीश विनय कुमार ने आरोपी रानू उर्फ सरताज वली को दोषी पाकर
आजीवन कारावास और 26 हजार रुपये जुर्माना सुनाया है।