टाइगर रिजर्व बनने के बाद से बाघ के हमले की घटनाएं लगातार हो रही हैं। सोमवार को चांदूपुर की गिरजा देवी बाघ के हमले की 23वीं शिकार हुईं। इसके अलावा एक व्यक्ति की मौत भालू के हमले में भी हो चुकी है। इसे मिलाकर वन्यजीवों के हमले में मरने वालों की संख्या 24 हो गई है।
नौ जून 2014 को जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। प्रांरभ में बाघों की संख्या कम होने पर वनकर्मियों की बेहतर देखरेख के चलते बाघ के हमले की घटनाओं पर अंकुश रहा, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद 23 अक्तूबर 2016 को न्यूरिया थाना क्षेत्र के मरौरी निवासी बेनीराम पर हमले की पहली घटना हुई थी। जबकि इससे पहले 03 अक्तूबर को भालू के हमले में मेघनाथ की मौत हुई थी। इसके बाद से शुरू हुआ बाघ के हमलों का सिलासिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बाघ के हमले में सोमवार को गिरजा देवी के रूप में 23वीं जान गई। जबकि भालू के हमले की मौत को भी शामिल करें तो 24वीं मौत है। वनविभाग के अनुसार इसमें 11 घटनाएं जंगल के अंदर और 13 घटनाएं जंगल के बाहर हुई हैं।
वर्ष 2016 की घटनाएं
मेघनाथ गांवनदहा कलीनगर,, बेनीराम गांव मरौरी, बाबूराम गांव पिपरिया संतोष,, अहमद खां गांव डगा
वर्ष 2017 की घटनाएं
राजीवराठौर, गांव पिपरिया संतोष,, धनीराम, गांव कुंवरपुर, नन्हेलाल, गांव पिपरिया,, गंगाराम, गांव कलीनगर, कलावती, गांव मेवातपुर,, ब्रह्मस्वरूप, गांव रम्पुरा, श्यामबिहारी, गांव जमुनिया, ताराचंद्र, गांव अनवरगंज, केवलप्रसाद, गांव रूपपुर मरौरी, मिहीलाल, गांव शिवपुरिया,, ननकी देवी, गांव मेथी सैदुल्लागंज, तसलीम अहमद , गांव डांग, शमशुल रहमान, गांव सरैदापट्टी, कुंवरसेन, गांव, बेहरी, रामचंद्र, गांव पीलीभीत, बबलू सरकार, गांव खरगापुर, जोगेंद्र सिंह, गांव गढ़ा, कैलाशोदेवी, गांव, पिपरिया दियोरिया।
वर्ष 2018 की घटनाएं
मथुरा प्रसाद, गांव, निजामपुर लाह, गिरजा देवी, गांव चांदूपुर वीरखेड़ा।