आत्महत्या को विवश करने के मामले में मां-बेटे सहित तीन आरोपियों की जमानत
अर्जी सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार ने खारिज कर दी है।
थाना
जहानाबाद पर अदालत के आदेश से रूपलाल ने 25 सितंबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज
कराई थी। इसके अनुसार उसके भाई नेवाराम की शादी करीब 15 साल पहले
चंद्रादेवी के साथ हुई थी। कोई बच्चा न होने के कारण चंद्रा देवी और उसके
मायके वाले नेवाराम से नाराज थे। उसे नार्मद कहकर अपमानित करते थे। 22
जुलाई 2013 को नेवाराम गुजरात से काम करके आया। पत्नी को बुलाने ससुराल
ग्राम गहलुइया गया।
वहां चंद्रादेवी, मां पार्वती, भाई नरेश, बहन
जसवंती आदि ने मजदूरी के पैसे छीन लिए और जहरीली चीज खिलाकर उसकी हत्या कर
दी। मामले में जहानाबाद पुलिस डेढ़ दो साल से विवेचना कर रही थी। नरेश,
जसवंती और पार्वती को बीते दिनों जेल भेज दिया था। तीनों आरोपियों की जमानत
अर्जी की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार की अदालत में हुई।
शासकीय
अधिवक्ता काजी रिफाकत हुसैन फरहान ने तर्क दिया कि बच्चा न होने के कारण
नेवाराम को अपमानित किया गया जिससे उसने आत्महत्या कर ली। यह समाज विरोधी
गंभीर अपराध है। अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।