चोरी या लूट के जेवर अपराधी के लिए अब आसान नहीं होगा। न ही गुपचुप तरीके से जेवर खरीदने के बाद सराफा कारोबारी अपनी जवाबदेही से बच सकेंगे। अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए एसपी देवरंजन वर्मा ने रणनीति बनाई है। एसपी ने चोरी का माल खरीदने वाले सराफा कारोबारियों और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए जिम्मेदारी तय की है। चोरी और लूट की घटनाओं के खुलासे के दौरान अक्सर पुलिस जेवरों की बरामदगी कम होने का बहाना सराफा कारोबारियों को बेचने का बनाती ह। मगर चोरी के जेवर खरीदने वाले सराफा व्यापारी को बतौर आरोपी कार्रवाई के घेरे में नहीं लिया जाता। इसको लेकर अक्सर व्यापारियों का विरोध पुलिस को झेलना पड़ता है। अब सराफा कारोबारी को जेवर बेचने वाले का नाम-पता और सोना बेचने की वजह भी पूछनी होगी। मोबाइल से बेचने वाले का वीडियो बनाने के साथ टाइमिंग भी दर्ज करने होगी। इससे जरूरत पर उसकी उपस्थिति प्रमाणित की जा सके। प्रत्येक माह पुलिस व्यापारियों के पास जाकर जेवर की खरीद फरोख्त करने वालों का डाटा कब्जे में लेगी और इसको अपने कंप्यूटर पर फीड करेगी। औचक चेकिंग कर इसके पालन को लेकर बरती जा रही गंभीरता का भी आंकलन अफसर खुद करेंगे। चोरी और लूट की घटनाओं के बाद आरोपियों की शिनाख्त के लिए बनाए गए वीडियो की मदद ली जाएगी। बेवजह बार-बार जेवर बेचने आने वाले भी पुलिस के रडार पर रहेंगे। ऐसा करने से माना जाएगा कि व्यापारी ने जेवर खरीदने से पहले पड़ताल की। इन नियमों की अनदेखी या फिर अवैध तरीके से जेवर खरीदने वाले व्यापारी पर कार्रवाई की जाएगी।