फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा वापस कैसे लिए मुकदमे

Wed, 13 Jul 2016 11:33 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
बाईस साल पहले जिला जेल में बंद सात टाडा बंदियों की पीट-पीट कर हत्या व 21 अन्य पर किए गए जानलेवा हमले के आरोपी जेल अधीक्षक व 41 जेल कर्मियों के मुकदमे सरकार की सिफारिश पर सीजेएम द्वारा वापस लेने के मामले में हाईकोर्ट की इलाहाबाद के न्यायमूर्ति केजे ठाकर की अदालत ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका सिख नेता हरजिंदर सिंह कहलो की ओर से दाखिल की गई थी।
विज्ञापन

आतंकवाद के दौर में जिला जेल की एक बैरक में बंद 28 टाडाबंदियों को आठ नवंबर 1994 की रात में जेल कर्मियों ने बैरेक से बाहर निकाल कर उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। इसमें सात टाडा बंदियों की मौत हो गई थी जबकि 21 गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह की ओर से नौ नवंबर 1994 को जेल कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। सीबीसीआईडी ने अपनी जांच के बाद इस मामले में 24 नवंबर 1995 में तत्कालीन जेल अधीक्षक बीएस यादव व 41 जेल कर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। इस पर कोर्ट ने सभी को न्यायालय में हाजिर होने का नोटिस भी जारी किया, लेकिन  प्रदेश सरकार ने जनहित में केस वापस लेने की संस्तुति कर कोर्ट में अभिलेख दाखिल करवा दिए। जिसके आधार पर 2007 में सीजेएम पीलीभीत ने केस बंद कर दिया। खास बात यह रही कि इस मामले में न तो पीड़ित परिवार को ही सुना गया न ही गवाहों को इसकी कोई खबर हुई।
अमर उजाला ने पांच अप्रैल 2016 के अंक में जब इसका खुलासा किया तो पीड़ित के परिवार वालों व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को इसकी खबर हो सकी। जिले के सिख नेता हरजिंदर सिंह कहलो ने करीब एक माह पहले इस मामले में याचिका दाखिल करते हुए सरकार के केस वापस लेने के फैसले व उसके आधार पर सीजेएम द्वारा केस बंद करने के आदेश पारित करने को चुनौती दी गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें