बारावफात जुलूस को लेकर हुए बवाल के बाद शहर का माहौल शांत है। मगर लोगों में दहशत अब भी व्याप्त है। मोहल्ला मोहम्मद वासिल की सड़कों पर सामान्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को कम लोग आते-जाते दिखे। उधर, माहौल शांत होने पर प्रशासन ने बाहरी जिलों की फोर्स लौटा दिया है। एहतियात के तौर पर एक दरोगा व पीएसी अभी भी मोहल्ले में तैनात है।
बुधवार की रात मद्दे की पुलिया पर तकरीर के बाद हसन मियां कदीरी जब समर्थकों के साथ जुलूस निकालने के लिए आगे बढ़े तो पुलिस और प्रशासनिक के अधिकारियों ने बिना अनुमति जुलूस निकाले जाने पर एतराज जताते हुए जुलूस को रोकने की कोशिश की थी। इसको लेकर जमकर नोंकझोंक के बाद समर्थकों व पुलिस के बीच संघर्ष हुआ था। समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया तो पुलिस ने भीड़ को दौड़ाने के लिए लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस संघर्ष में चलीं गोलियों से तीन लोग और पथराव से एएसपी सुधीर कुमार सिंह सहित चार सिपाही घायल हुए थे। बवाल के बाद घटना स्थल एवं इसके आसपास के मोहल्लों में भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दिया गया था। तीसरे दिन माहौल शांत रहा। प्रशासन ने मोहल्ले में तैनात बाहरी जिलों की फोर्स को हटाकर वापस भेज दिया है, जबकि शांत व्यवस्था की दृष्टि से एक दरोगा और पीएसी मोहल्ले में अभी भी तैनात है। फोर्स के हटने के बाद से आम दिनों की अपेक्षा कम लोग सड़कों पर आते-जाते दिखाई दिए, लेकिन लोगों में दहशत अभी भी व्याप्त है।
गिरफ्तारी के भय से भूमिगत हुए लोग
पुलिस ने हसन मियां कदीरी, उनके दो भाई अयूब कदीरी व इरफान कदीरी सहित 10 नामजद और 600-700 अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने आदि तमाम गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अधिकतर लोग गिरफ्तारी के भय से घरों से पलायन कर गए हैं। घरों में महिलाएं और बच्चे हैं।