झोलाछाप पर दुष्कर्म का आरोप लगा रही महिला को दूसरे दिन भी कार्रवाई के लिए पुलिस के चक्कर लगाना पड़े। बरखेड़ा पुलिस ने घटनास्थल दूसरा बताकर गजरौला थाना भेज दिया। यहां दिन भर जांच के नाम पर पुलिस पीड़ित परिवार को ही झूठा करार देकर धमकाने में लगी रही। थानाध्यक्ष का कार्यभार संभाल रहे दरोगा सीपी सिंह बेशर्म बोल के साथ बेबाक बयानबाजी करते रहे। मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जहमत नहीं उठाई। उधर, अफसर दरोगा की गलती मानने के बजाए इस पर पर्दा डालने में जुटे रहे। बरखेड़ा क्षेत्र के एक गांव की महिला ने बुधवार शाम बरखेड़ा पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 16 जून को गांव का एक झोलाछाप उसकी सास का खून चेक कराने के लिए शहर की पैथोलॉजी पर ले गया। सास को एक स्थान पर बैठाने के बाद जांच रिपोर्ट लेने चलने की बात कहकर उसे बाइक से अपने साथ ले गया। माधोटांडा रोड पर देवीपुरा गौटिया के पास नशा देकर गन्ने के खेत में दुष्कर्म किया। मामले सामने आने के बाद से पुलिस इसको झुठलाने में लग गई। देर शाम बरखेड़ा पुलिस ने घटनास्थल गजरौला थाना के अंतर्गत आने की बात कहकर टरका दिया। जिसके बाद बृहस्पतिवार सुबह महिला परिवारीजनों संग गजरौला थाना पहुंची। आरोप है कि गजरौला पुलिस महिला को लेकर उसकी सास के पास गई। कुछ देर बातचीत करने के बाद महिला को वापस जाने को कह दिया। कार्यवाहक थानाध्यक्ष सीपी सिंह ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करने के बजाए बेबाक बयानबाजी शुरू कर दी। पूरा ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ दिया। खास बात रही कि घटना को फर्जी करार तो दिया गया, लेकिन पुलिस इसके पीछे एक कारण नहीं बता सकी है। 24 घंटे सीमा विवाद में उलझने के बाद झूठा करार देकर इतिश्री कर ली गई। कार्यवाहक थानाध्यक्ष गजरौला सीपी सिंह ने बताया कि महिला की शिकायत पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। मीडिया मामले को जिस तरह से प्रकाशित करना चाहे, कर सकती है। उधर, सीओ सिटी निशांक शर्मा का कहना है कि दरोगा की जांच में आरोप गलत पाए गए हैं कोर्ट में मुकदमा डालने से पहले पुलिस के पास शिकायत की उपस्थिति दर्ज कराने को तहरीर दी गई है। मामला पूरी तरह से झूठा है। सवाल यह है कि अगर महिला ने रेप जैसे संगीन आरोप की झूठी तहरीर दी, फिर उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आखिर किस रंजिश को लेकर महिला ने झूठा आरोप लगाया? पुलिस की जांच में कौन से तथ्य सामने आए, जिनसे यह किया जा सका कि आरोप झूठे है? ऐसे कई सवालों जवाब थाना पुलिस से लेकर अफसर तक किसी के पास नहीं है।