स्टेशन मास्टर व
रेलवे कर्मचारी की पिटाई मामले ने बेशक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया
निशान लगा दिया है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी ‘अपनों’ को बचाने में
विभागीय अधिकारी जुट गए हैं। कोतवाली इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह का कहना है
कि पुलिस की टीम मोहल्ला चौक में बदमाशों के होने व ट्रेन से भागने की
सूचना पर रेलवे स्टेशन पहुंची थी।
एएसपी ने भी साफ कह दिया है कि आरोपी
पुलिस वालों की गिरफ्तारी नहीं होगी। यही नहीं इस मामले में एक दरोगा समेत
पांच पुलिस वालों के संलिप्त रहने के बावजूद एसपी द्वारा मात्र दो
पुलिसकर्मियों को ही सस्पेंड करना भी कहीं न कहीं इसी ओर इशारा कर रहा है।
सोमवार
की रात कोतवाली के एक दरोगा व चार सिपाहियों ने रेलवे स्टेशन पर जमकर
उत्पात मचाया। रेलवे स्टेशन मास्टर व एक अन्य रेल कर्मचारी की बबर्रता
पूर्वक पिटाई की। मामला गंभीर था इसलिए पुलिस ने स्टेशन मास्टर की ओर से
रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन इसी के साथ अधिकारी ‘अपनों’ को बचाने में जुट
गए।
खास बात यह है कि यह पूरी घटना जिस दरोगा की अगुवाई में अंजाम दी गई
उसके खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। पांच पुलिस वालों में से मात्र दो
को निलंबित कर खानापूर्ति कर ली गई। यही नहीं अधिकारी यह जानते थे कि देर
सबेर यह सवाल उठेगा कि आखिर सिविल पुलिस स्टेशन पर गई क्यों थी? तब उन्हें
जवाब देना मुश्किल हो सकता है, लिहाजा उसका भी तानाबाना इंस्पेक्टर धर्मपाल
सिंह ने बुन लिया।
पूछने पर बताया कि मोहल्ला चौक में बदमाशों के होने की
सूचना मिली थी। इस पर दरोगा सिद्धार्थ गोस्वामी, हेड कांस्टेबल दुर्विजय
सिंह, असलम, घनश्याम रावत, वसी, नरेंद्र, मुनेश मोहल्ले में गए, लेकिन
बदमाश नहीं मिले। ट्रेन से जाने की आशंका पर पुलिस टीम रेलवे स्टेशन पर गई
थी।
पुलिसकर्मी की सफाई
आरोपी सिपाही असलम ने बताया कि
मोहल्ला चौक से बदमाशों के रेलवे लाइनपार की ओर जाने की सूचना मिली थी। इस
पर रेलवे स्टेशन पार कर लाइनपार जा रहे थे। स्टेशन पर बगैर वर्दी के स्टेशन
मास्टर सहित तीन कर्मचारी एक बेंच पर बैठे थे। बेंच के समीप दो युवक खड़े
कर्मचारियों से बातें कर रहे थे। पुलिस को देखकर दोनों युवक लाइनपार की ओर
भाग गए। भागे युवकों के बारे में जानकारी करने पर कर्मचारियों ने अभद्रता
शुरू कर दी, जिसमें हाथापाई हुई।
बगैर परमीशन के स्टेशन पर पहुंचे पुलिसकर्मी
पूरनपुर।
स्टेशन अधीक्षक कैसर इमाम ने बताया कि पूरे मामले से उच्च अफसरों को अवगत
करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि रेलवे परिसर में वैसे कोई घटना पर
अक्सर सिविल पुलिस जीआरपी का क्षेत्र होना बताकर टाल-मटोल करती है। रेलवे
स्टेशन पर बगैर परमीशन के सिविल पुलिस चेकिंग नहीं कर सकती। पुलिसकर्मी
बगैर किसी परमीशन के स्टेशन पर आए और कर्मचारियों की पिटाई की है।
स्टेशन मास्टर ब्रजमोहन ने पहुंचकर संभाली ड्यूटी
घटना
के समय तैनात स्टेशन मास्टर की सोमवार को सोलह बजे (शाम चार बजे) से 24
बजे (रात बारह बजे) तक ड्यूटी थी। जबकि रात बारह बजे से दूसरे स्टेशन
मास्टर ब्रज मोहन की ड्यूटी थी। स्टेशन मास्टर ब्रजमोहन ने निर्धारित समय
पर पहुंचकर रेलवे स्टेशन की कमान संभाली।
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घटना के समय चौकी में सो रहे थे जीआरपी वाले
घटना
के समय अगर जीआरपी वाले रेलवे स्टेशन पर गश्त करते होते तो शायद घटना टल
सकती थी। कर्मचारी पिटते रहे और जीआरपी चौकी में सोती रही। स्टेशन अधीक्षक
कैसर इमाम ने बताया कि कर्मचारियों के चीखने पर बमुश्किल जीआरपी
कांस्टेबिलों की आंख खुली। घटना के बाद एक जीआरपी का सिपाही कर्मचारियोें
को जीआरपी थाना पीलीभीत ले गया।
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घटना के समय स्टेशन पर था अंधेरा
रेलवे
स्टेशन पर प्रकाश व्यवस्था के लिए सौर ऊर्जा की लाइटों के अलावा जनरेटर
की भी व्यवस्था है। जनरेटर की चाबी वाणिज्य अधीक्षक सोमवार को अपने साथ ले
गए थे। इससे जनरेटर नहीं चल सका। वाणिज्य अधीक्षक के लौटने पर आधी रात को
कुछ देर के लिए जनरेटर चलाया गया।
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पहले भी पिट चुके हैं रेल कर्मचारी
करीब
दो साल पहले दुधियाखुर्द स्टेशन पर टिकट वितरण के समय विवाद पर कुछ लोगों
ने वहां तैनात स्टेशन मास्टर की पिटाई कर दी थी। स्टेशन मास्टर ने घटना की
तहरीर भी जीआरपी को दी थी, लेकिन बाद में समझौता हो गया था।
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कल ही राजीव ने संभाला था चार्ज
स्टेशन
मास्टर राजीव श्रीवास्तव पिछले कई महीनों से शाहगढ़ स्टेशन पर तैनात थे।
स्टेशन अधीक्षक कैसर इमाम ने बताया कि राजीव ने सोमवार को ही स्टेशन
पहुंचकर चार्ज लिया था। चार्ज के बाद पहली ड्यूटी पर थे। राजीव इससे पहले
भी पूरनपुर स्टेशन पर कई माह तैनात रह चुके हैं।