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कच्ची पर लगाम का होता है सिर्फ दिखावा

Tue, 19 Jul 2016 10:46 PM IST
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
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 कच्ची शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के नाम पर अफसरों की ओर से चलाए जा रहे अभियान में थाना स्तर से सिर्फ औपचारिक कार्रवाई की जा रही है। चंद छोटे धंधेबाजों को पकड़कर मातहत पीठ थपथपा रहे हैं। जबकि विभिन्न थाना क्षेत्रों में कच्ची का  जहरीला धंधा खूब फलफूल रहा है। 
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विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिले के चौदह थाना क्षेत्रों में कच्ची शराब के कारोबार को लेकर 339 इलाके चिह्नित हैं, जिनमें खुलेआम अवैध तरीके से शराब की भट्ठियां लगी रहती हैं। हजारा, पूरनपुर, माधौटांडा क्षेत्र के गांवों में तो बड़े पैमाने पर कारोबार हो रहा है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी दर्जनों गांव कच्ची शराब बनाने के लिए पहचाने जाते हैं। एटा के अलीगंज तहसील क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। घटना के बाद पुलिस की ओर से सख्ती के दावे कर छापामारी भी कराई गई। अफसोस इसका रिजल्ट अफसरों के लिए भले ही संतोषजनक हो, लेकिन हकीकत खाकी की कार्यशैली पर तमाम सवाल खड़े कर रही है। आरोप यहां तक लगते हैं कि पुलिस की धंधेबाजों से साठगांठ के चलते कार्रवाई नहीं हो पाती। अफसरों का दबाव बढ़ने पर अधिकांश थाना प्रभारी क्षेत्र में निकलते ही नहीं, पुराने रिकार्ड खंगालकर फिर छोटे धंधेबाजों को कार्रवाई का हिस्सा बना लिया जाता है। नतीजतन हालात सुधरने के बजाए, धंधे में लिप्त बड़े माफियाओं के लिए मददगार बन जाते है। 
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गलियों में घुसते ही होता अहसास 
कच्ची शराब के कारोबार को लेकर पूरनपुर सर्किल में तमाम ऐसे स्थान है। जहां पर घुसते ही शराब बनाने की महक से अहसास हो जाता है। जगह-जगह जंगलों के बीच भट्ठियां दहकती रहती है, लेकिन कार्रवाई के लिए इन जगहों पर पुलिस की सख्ती नहीं दिखती। इसके अलावा दियोरिया, गजरौला, जहानाबाद, न्यूरिया बीसलपुर समेत अन्य क्षेत्रों में भी हालात जुदा नहीं है। 
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चिह्नित गांवों की थानावार संख्या 
सुनगढ़ी        : 13
कोतवाली     : 8
गजरौला       : 35
जहानाबाद    : 26
अमरिया      : 13
न्यूरिया       : 26
बीसलपुर     : 18
बरखेड़ा       : 13
दियोरिया     : 20
बिलसंडा     : 31
पूरनपुर        : 55
माधौटांडा    : 54
हजारा        : 13
सेहरामऊ   : 14

हजारों लीटर का है धंधा
सिविल पुलिस के अलावा आबकारी पुलिस भी छापामारी के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन आबकारी की ओर से की गई कार्रवाई भी बड़े धंधेबाजों पर नहीं दिखती। बीस, पचास तो कभी सौ लीटर पकड़कर ही वाहवाही लूटी जाती है। जबकि सूत्रों की मानें तो कारोबार हजारों लीटर का है। 
वर्जन
17 पीबीटीपी 24
आबकारी विभाग को हर संभव सहयोग दिया जाता है। इसके अलावा पुलिस भी समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करती है। लोगों को पकड़कर जेल भेजा गया है। कहीं कोई कमी मिलती है तो सख्ती की जाएगी। 
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- विकास कुमार वैद्य, एएसपी 
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