दिल का ऑपरेशन कराने को आने वाले खर्च के लिए बैंक से निकालने गए भुगतान न मिलने से कस्बा निवासी नफीस की मौत हो गई। रविवार को उसका शव घर पहुंचने पर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
नोट बंदी की रूसवाइयां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कस्बा के मोहल्ला खेड़ा निवासी 45 वर्षीय नफीस की पिछले कुछ दिनों से तबियत खराब हो गई थी। उन्हें पहले शहर के एक अस्पताल में दिखाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर बरेली के राममूर्ति मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। दिल की बीमारी से जूझ रहे नफीस को चिकित्सकों ने आपरेशन की सलाह दी और जल्द धनराशि की व्यवस्था करने को कहा था। इसके बाद से उसका परिवार बैंक में जमा लगभग 50 हजार रुपये की नकदी प्राप्त करने को लगातार बैंक के चक्कर लगाता रहा, लेकिन बैंक में धनराशि न होने के कारण उन्हें रुपये नहीं मिल सके। धनराशि न मिलने के कारण उसका आपरेशन नहीं हो सका। जिससे उसकी तबियत बिगड़ती गई। शनिवार शाम उसने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। नफीस की पत्नी परवीन ने बताया कि आपरेशन के लिए करीब एक लाख रुपये की व्यवस्था करनी थी, जिसमें 50 हजार खाते से निकालने का प्रयास किया गया, जबकि बाकी रकम लोगों से उधार मांगी थी, लेकिन अब अपना ही रुपया बैंक से नहीं निकला तो दूसरों से पैसा कैसे मिलता। आपरेशन न होने के कारण उसके पति की मौत हो गई। रविवार को शव घर पहुंचा। दोपहर बाद उन्हें सुपुर्दे खाक कर दिया गया।