पुलिस अधिकारी भले ही कानूून व्यवस्था बेहतर होने का दावा कर खुद की पीठ थपथपा रहे हों। तीन साल का आंकड़ा दिखा इस बार चोरी की घटनाओं में कमी होने की बात कही जा रही है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी चोरी की वारदातों का खुलासा करने में पुलिस नाकाम रही है। बंद मकान को निशाने पर लेकर वारदात करने वाले चोर पुलिस की पकड़ से दूर हैं। खास बात यह है कि घटनाओं के वर्कआउट में असफल पुलिस नया फंडा अपना रही है। अफसरों की डांट डपट से बचने के लिए पीड़ित की तहरीर पर रिपोर्ट लिखो और भूल जाओ...।
अफसरों की लापरवाही के चलते थाना स्तर पर घटनाओं के खुलासे को लेकर कोई काम नहीं किया जा रहा है। 21 नवंबर 2017 को सुनहरी मस्जिद पिकेट प्वाइंट पर दुकान के ताले तोड़कर चोर हजारों का सामान समेट ले गए। 14 नवंबर को पॉश बल्लभ नगर कॉलोनी में दस्तक देकर गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष रचित अग्रवाल के बंद मकान से चोर 17 लाख का नकदी-जेवरात समेट ले गए। बरेली हाइवे पर ललौरीखेड़ा के पास सराफ की दुकान से 17 लाख की चोरी की गई। जाटो चौराहे पिकेट प्वाइंट पर स्पेयर पार्ट्स की दुकान से साढ़े तीन लाख रुपये ले गए थे। इनकी सूचना के बाद पुलिस की टीमें गठित कर जल्द वर्कआउट की बात कही गई, लेकिन उसका नतीजा आज तक नहीं निकल सका है। मौका मुआयना करने के बाद न तो पुलिस दुबारा पीड़ित से जानकारी करने पहुंची और न ही संदिग्धों की धरपकड़ की गई। ऐसे में घटनाओं का अंजाम फाइनल रिपोर्ट से अलग नहीं दिखाई दे रहा है।
चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए स्वॉट और सर्विलांस टीम कार्य कर रही है। कुछ सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं, जिन पर काम किया जा रहा है। गैर जनपद के कुछ संदिग्ध प्रकाश में आए हैं, जल्द परिणाम सामने आएंगे।
-कलानिधि नैथानी, एसपी