14 मार्च को लकड़ी बीनने जंगल गया था हुकुमचंद्र
चौथे दिन मिला क्षतविक्षत शव
लकड़ी बीनने गए अधेड़ को उत्तराखंड के जंगल में बाघ ने हमला कर मार डाला। सूचना पर सुरई रेंज के एसडीओ भी मौके पर पहुंच गए हैं। तीन दिन बाद उसका क्षतविक्षत शव सुरई रेंज में नहर किनारे मिला है। घर वालों के पहचान के बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव कल्लिया निवासी 45 वर्षीय हुुकुमचंद्र 14 मार्च को लकड़ी बीनने गया था लेकिन घर नहीं लौटा। इस पर उसके इकलौते पुत्र संजीव ने गांव वालों की मदद से उसकी तलाश शुरू की। काफी तलाश के बाद चौथे दिन जिले के टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज से सटी उत्तराखंड की सुरई रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 47सी के पास नहर किनारे उसका क्षतविक्षत शव मिला। पास पड़ी साइकिल, कपड़े एवं शरीर के शेष बचे अंगों से घर वालों ने उसकी पहचान की। पहचान होने पर हुकुमचंद्र के पुत्र संजीव ने बाघ के हमले में मौत होने की सूचना पुलिस और उत्तराखंड वनविभाग को दी। इस पर खटीमा वनप्रभाग के एसडीओ बाबूलाल टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर में पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। एसडीओ बाबूलाल ने बताया कि हुकुमचंद्र पर बाघ ने हमला किया है। तीन दिन में बाघ ने शरीर का अधिकांश हिस्सा खा लिया है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है।
आठ साल पहले हो चुकी है पत्नी की मौत
हुकुमचंद्र के परिवार में पत्नी और एक मात्र बेटा संजीव कुमार है। गांव में करीब डेढ़ बीघा जमीन पर खेती करने के साथ मेहनत मजदूरी कर वह परिवार का भरण पोषण करता था। करीब आठ साल पूर्व बीमारी के चलते उसकी पत्नी लक्खो देवी की मौत हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद से हुकुम चंद्र टूट गया था। अब 18 वर्षीय इकलौते बेटे की संजीव का घर बसाने की तमन्ना थी लेकिन बाघ के हमले में हुई मौत से उसकी यह इच्छा भी अधूरी रह गई। पहले मां और बाप का साया सिर से उठ जाने से संजीव का रो रो बुरा हाल है। हुकुम चंद्र के दो बड़े भाई क्रमश रामकृष्ण और शिवकुमार हैं जिसमें शिवकुमार गांव में और रामकृष्ण मझोला में रहते हैं।