विधानसभा चुनाव को लेकर इंडो-नेपाल बार्डर पर सजगता बरतने के निर्देश अफसरों ने दिए हैं, लेकिन इसका असर नहीं दिखाई दे रहा। खाद और पशुओं की तस्करी धड़ल्ले से की जा रही है। इसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल का रास्ता तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। कई दशक से नेपाल बार्डर का रास्ता तस्करों के लिए मददगार साबित हो रहा है। विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित होने व आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद उच्चाधिकारियों द्वारा बार्डर के इलाके में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए थे। इसके बाद तस्करी पर रोकथाम के कयास लगाए जा रहे थे। इसको लेकर पुलिस, प्रशासन के अतिरिक्त वन विभाग के अधिकारी अलर्ट होने के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन असर दिखाई नहीं देता। शारदा नदी से सटे ब्लाक क्षेत्र के ग्राम धुरिया पलिया, मझारा, रमनगरा, मोतियाघाट आदि पर तस्करों की आवाजाही अधिक है। इसमें खाद व पशुओं की तस्करी जारी है। शारदा नदी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल के रास्ते तस्कर निकलते है। इसका संज्ञान होने के बाद भी अधिकारियों की ओर से पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए गए। थानाध्यक्ष मनोज कुमार त्यागी का कहना है कि तस्करी को लेकर क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। गश्त के अलावा अगर कोई सूचना मिलती है, तो तत्काल कार्रवाई कराई जाती है।