किंगफिशर कंपनी के मालिक विजय माल्या के लोन की गारंटी लेने के आरोप में बिलसंडा ब्लाक के गांव खजुरिया नवीराम निवासी किसान मनमोहन सिंह का बैंक ऑफ बड़ौदा की नाद शाखा द्वारा सीज किया गया उसका खाता मुंबई के रीजनल कार्यालय से आए दिशा निर्देश के बाद शुक्रवार देर शाम खोल दिया गया।
शाखा प्रबंधक मांगेराम ने बताया कि सितंबर 2015 में मुंबई के रीजनल कार्यालय से आए एक मेल में किसान मनमोहन सिंह को विजय माल्या का गारंटर बताते हुए उसका खाता सीज करने के निर्देश दिए गए थे। उस दौरान उन्होंने किसान से यह जानकारी ली थी कि उसने कभी विजय माल्या नाम के किसी व्यक्ति की कोई गारंटी तो नहीं ली। मनमोहन सिंह के ऐसी किसी गारंटी की बात से इंकार करने के बाद उन्होंने रीजनल कार्यालय उस पत्र के परिपेक्ष में भेजकर उसके नाम, पते की पुष्टि करना चाहा था, लेकिन जब काफी दिनों तक कोई जवाब नहीं आया तो कुछ दिन पहले उन्होंने खाते सीज कर दिए थे। शाखा प्रबंधक ने बताया कि मनमोहन के दो बैंक खातों में करीब पांच हजार रुपये हैं और वह करीब पांच लाख का कर्जदार है। शाखा प्रबंधक ने बताया कि मामला अखबार की सुर्खियां बनने के बाद शुक्रवार को उन्होंने किसान के गांव जाकर व अन्य श्रोतों से यह जानने की कोशिश की कि खाता धारक का मुंबई आदि से कोई ताल्लुक आदि रहा है या नहीं। प्रथम दृष्ट्या उसका मुंबई अथवा माल्या आदि से कोई संबंध प्रकाश में न आने पर उन्होंने रीजनल कार्यालय के माध्यम से मनमोहन सिंह के खाते से रोक हटाने संबंधी दिशा निर्देश मांगे थे।
शाखा प्रबंधक ने बताया कि सायं मुंबई रीजनल कार्यालय से इस बावत मिले दिशा निर्देश के बाद किसान मनमोहन सिंह का खाता खोल दिया गया है। यह पूछने पर कि यह गलती कहां से व कैसे हुई? अथवा किसान मनमोहन सिंह के माल्या के गारंटर होने अथवा न होने के मामले की जांच में क्या निकला? इस बावत उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। शाखा प्रबंधक का कहना था कि इस बावत मुंबई रीजनल कार्यालय ही कुछ बता सकता है। उन्होंने बताया कि किसान को उसके खाते खोल दिए जाने संबंधी जानकारी भी दे दी गई है।