वन्य जीव प्रेमी मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र में अफसरों के नाक के नीचे बीच शहर में एक कमरे में कैद पकड़े गए करीब तीन सौ पक्षी ने यहां के टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा पर तो सवाल खड़े ही किए हैं साथ ही पुलिस व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की ख्याति देश ही नहीं विदेश में भी वन्य जीव, पक्षी प्रेमी के रूप में हैं। अपने वन्यजीव प्रेम के चलते वह देश-विदेश के विभिन्न मंचों से सम्मानित भी होती रहीं हैं। पर बीच शहर में करीब तीन सौ जंगली पक्षियों (देशी-विदेशी तोते, कबूतर) आदि के पकड़े जाने की घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह भी बताया जा रहा है कि जिस परिवार के कब्जे से यह पक्षी बरामद किए गए हैं वह परिवार लंबे समय से पक्षियों को पकड़ कर दूर दराज के शहर में बेचने का गोरख धंधा लंबे समय से करता रहा है। इसके अलावा जिले में टाइगर रिजर्व भी है। खास कर पक्षी उसी जंगल व उसमें मौजूद तालाब के आसपास ही आते हैं। इससे साफ है कि यह पक्षी भी टाइगर रिजर्व के जंगल से ही पकड़ कर लाए गए होंगे। तब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों के जंगल से पकडने की भनक तक स्टाफ को नहीं लगी। इससे टाइगर रिजर्व के अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगना लाजमी है।
इससे भी इतर बात यह है कि शहर स्थित जिस घर में यह पक्षी बंद पाए गए वह घर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मात्र 25 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा सामाजिक वानिकी का कार्यालय मात्र 150 मीटर दूर है। यही नहीं रोडवेज बस स्टैंड व अधिशाषी अभियंता (विद्युता) का कार्यालय 100 मीटर, जिला उद्योग केंद्र 75 मीटर दूरी पर स्थित है। उद्यान विभाग का कार्यालय भी करीब 200 मीटर की दूरी पर है। सुनगढ़ी थाने की दूरी 500 मीटर है। कुल मिलाकर यह स्थान शहर का व्यस्ततम क्षेत्र कहा जाता है। इसके बावजूद पक्ष्यिों का पकड़ कर वहां तक पहुंचना व वहां से दूर दराज के शहरों में ले जाकर बेचना भी जिले की पुलिस प्रशासन व वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
सभासद का चुनाव लड़ चुकी है आरोपी
जिस घर में पक्षी पकड़े गए हैं वह घर एक महिला कांग्रेसी कार्यकर्ता का बताया जा रहा है। कहां तो यहां तक जा रहा है कि वह महिला नगर पालिका के वार्ड नं. दो (सुरक्षित) मोहल्ला बाग गुलशेर खां से सभासद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।