गांव भूड़ा में
मंगलवार को मां ने अपने चार साल के बेटे मोहनस्वरूप उर्फ बादल को इतना
पीटा था कि उसका का दिल और लीवर ही फट गया था। इस बात की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। वेहीं पति गेंदनलाल की तहरीर पर पुलिस ने
अभागन मां गीता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर चालान कर
दिया है।
गेंदनलाल ने बताया कि वह मंगलवार को पड़ोस के गांव पंडरी में
मजदूरी करने गया था। घर पर पत्नी गीता देवी और चार साल का पुत्र मोहनस्वरूप
उर्फ बादल था। शाम को बादल ने घर से ढाई सौ ग्राम चावल चोरी कर लिया और
दुकान पर बेंचकर टॉफी खरीद ली। चावल चोरी करने की जानकारी जब पत्नी को हुई
तो गीता आपा खो बैठी।
पिता ने बताया कि गीता ने पुत्र को कमरे में बंद
कर खिड़की से बांध दिया फिर उसकी जमकर पिटाई की।
इससे उसकी मौके पर मौत हो
गई। घटना की जानकारी ग्रामीणों को तब हुई जब गीता उसे गांव के एक डॉक्टर के
पास ले गई। डॉक्टर ने पुत्र को मृत घोषित कर दिया। पड़ोस के एक युवक ने
पिता गेंदनलाल को घटना की जानकारी दी। जब वह घर पहुंचा तो पुत्र का शव पड़ा
था। उस दौरान पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया था।
अब जो
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है वह किसी का भी रूह कंपा देने वाली है।
रिपोर्ट
के अनुसार मां गीता देवी ने अपने मासूम बेटे चार वर्षीय मोहनस्वरूप उर्फ
बादल को इतना पीटा की उसका दिल व लीवर फट गया। इस बात की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। पोस्टमाटर्म रिपोर्ट के मुताबिक मासूम के
शरीर पर डंडे की चोट से पूरा शरीर नीला पड़ा पाया गया।
वहीं सीओ ने बताया
कि गेंदनलाल की तहरीर पर हत्यारोपी पत्नी के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की
रिपोर्ट दर्ज की गई है। बुधवार को महिला का चालान कर कोर्ट में पेश किया
गया, जहां से अदालत ने उसे जेल भेज दिया।
दो मुट्ठी चावल के लिए उजाड़ ली अपनी कोख
पीलीभीत।
मम्मी छोड़ दो... मम्मी छोड़ दो... की आवाजें 15 मिनट बाद खामोश हो गईं।
उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे पर दरवाजा अंदर से बंद था। वे
असहाय बाहर खड़े रहे और अंदर मासूम बादल तड़प-तड़प कर मर गया। थाना अमरिया
के गांव भूरा में दो मुट्ठी चावल चोरी करने पर मासूम मोहनस्वरुप उर्फ बादल
की जान उसकी ही मां ने ले ली। गीता को अब अपने किए पर पछतावा है।
गेंदनलाल
की शादी सात साल पहले हुई थी। उसने काफी मन्नौतियां मांगी तो बेटे के रुप
में बादल घर में आया। बादल घर का इकलौता चिराग था। जिसे मां गीता देवी भी
काफी प्यार करती थी। लोगों के अनुसार मासूम की चीख पुकार पर आसपास के लोग
दरवाजे तक तो पहुंचे, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण वह असहाय रहे।
गीता
देवी को अब अपने किए पर पछतावा हो रहा है। वह पुत्र की मौत के बाद से
गुमशुम है। लोग उसे कोस रहे हैं मगर वह खुद अपने को अभागन मान रही है।