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गली-गली हो रहा अश्लील वीडियो क्लिप का धंधा

Tue, 05 Jul 2016 11:39 PM IST
वैभव शुक्ला  पीलीभीत।
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- फोटो : अमर उजाला
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महज 25 रुपये में डाउनलोड कर देते हैं अश्लील वीडियो क्लिप
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पुलिस खामोश, मनोरजंन कर विभाग भी कर रहा है अनदेखी
 पुलिस की आदत सी बन गई है सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने की॥  अपराध होने के बाद ही पुलिस की सक्रियता दिखाई देती है। समय रहते अपराध रोकने के लिए कदम नहीं उठाए जाते। शहर में इन दिनों अश्लील वीडियो क्लिप डाउन लोड करने का धंधा गली-गली फलफूल रहा है लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। 
वैसे तो इसे रोकने के लिए सख्त कानून बने हं्ै। समय-समय पर चेकिंग कर कार्रवाई करने के भी उच्चाधिकारियों के निर्देश हैं, लेकिन इन निमयों का पालन कराने के लिए स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के पास समय नहीं है। पुलिस तो इसके प्रति कतई संजीदा नहीं दिखती। मनोरंजन कर विभाग की मौजूदगी का भी अतापता नहीं लगता। यह बात दीगर है पिछले साल हुई छापेमारी को ही गिनाकर अब तक वाहवाही बटोरी जा रही है। शहर से लेकर देहात तक गली-नुक्कड़ों की दुकानों पर धड़ल्ले से मोबाइल चिप डाउनलोडिंग के नाम पर 25 से 30 रुपये में कानून को तार-तार किया जा रहा है। कार्रवाई में बरती गई लापरवाही पर पुलिस तर्क देती है कि इंटरनेट के जरिए सीधे डाउनलोडिंग कर ली जाएगी, तो उसे कैसे रोका जा सकेगा।
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एक क्लिप से हिल चुका है शासन 
एक अश्लील क्लिप जिले से लेकर राजधानी लखनऊ तक बैठे अधिकारियों की नींद उड़ा चुकी है। बता दें कि तीन महीने पहले सुनगढ़ी क्षेत्र के एक दलित युवक के मोबाइल पर एक क्लिप अंजान नंबर से पहुंची थी। इसमें एक युवती का छह दरिंदे रेप कर रहे थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि क्लिप शहर की ही एक दुकान से डाउनलोड कराई गई, फिर भेजी गई। एक आदमी को क्लिप में पीड़ित युवती का चेहरा अपनी बेटी से मिलता जुलता लगा। इसके बाद खुद डीजीपी ने भी मामले का संज्ञान लिया। प्रदेश की मीडिया में घटना सुर्खियों में रही। बाद में क्लिप किसी और की निकली और युवती को पुलिस ने पंजाब से प्रेमी के साथ पकड़ लिया। हालांकि जब तक महकमा गुत्थी सुलझा सका,  थाना प्रभारी लाइन हाजिर हो चुके थे और हल्ला सड़कों तक आ चुका था।

तीन साल में एक बार भी नहीं हुई कार्रवाई
समय-समय पर पुलिस को इसकी चेकिंग के निर्देश है, लेकिन कागजों में ही छापेमार कार्रवाई पूरी कर ली जाती है। तीन सालों की बात करें, तो एक बार भी पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। उधर, मनोरंजन कर विभाग की ओर से भी अभी तक कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं। 

माधोटांडा कांड से भी नहीं लिया सबक
जून में माधोटांडा के एसओ दुर्गेश मिश्र ने बीए की एक छात्रा की शिकायत पर मोबाइल रिपेयरिंग शॉप में छापेमारी की थी। दुकान में मिले लैपटॉप में छात्रा के तीन हजार से अधिक अश्लील फोटो मिले थे। इसके अलावा भी कई क्लिप और फोटो पाए गए थे। इसके बाद भी पुलिस ने सबक नहीं लिया। दुकानों की चेकिंग करने की जहमत नहीं उठाई। 

मासूमों से दरिंदगी में भी जिम्मेदार 
पुलिस भले ही इस कारोबार को गंभीरता से न ले, लेकिन यह स्पष्ट है कि मासूमों से दरिदंगी और कुकर्म की घटनाओं में कहीं न कहीं यही अश्लील क्लिप जिम्मेदार रही हैं। अधिकांश घटनाओं में हैवानियत दिखाने से पहले आरोपियों द्वारा क्लिप देखे जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा रेप में पकड़े गए नाबालिग आरोपियों ने भी क्लिप देखने के बाद घटना करने की बात कही। 
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साइबर कैफे की नहीं होती चेकिंग
त्योहारों को लेकर तो कभी गंभीर घटनाओं के बाद अलर्ट जारी होने पर साइबर कैफे की चेकिंग के आदेश दिए जाते है। पुलिस कर्मी अभिलेखों में इसको मेंटेन करते है। पिछली बार कब चेकिंग की गई थी, यह तक उनको याद नहीं होता। सिर्फ कागजी लकीर पीटकर अफसरों को खुश किया जा रहा है। 

अभी तक मुझे इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा हो रहा तो इसकी जांच कराई जाएगी। अगर लोग आकर शिकायत करेंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
निर्मल विष्ट, सीओ सिटी

समय-समय पर छापेमार कार्रवाई की जाती है। इसमें विभाग द्वारा एक लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। शिकायत मिलने पर दुबारा छापेमारी की जाएगी। 
- एके गौतम, मनोरंजन कर अधिकारी
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