खारजा नहर में बृहस्पतिवार शाम बाइक नहर में गिरने के बाद पानी में बहे तीन साल के मासूम संजय का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लग सका। उधर जिला अस्पताल में भर्ती संजय के पिता राधेश्याम की देर रात ढाई बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार सुबह इसकी जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
खटीमा माधोटांडा रोड पर बृहस्पतिवार शाम चार बजे बाइक अनियंत्रित होकर खारजा नहर में गिर गई थी। हादसे में ससुराल से लौटकर घर जा रहे ग्राम दयालपुर गांव निवासी मजदूर राधेश्याम (35), उसकी पत्नी किरनदेवी और ग्रामीण रामऔतार घायल हो गए थे। जबकि बाइक पर आगे बैठा संजय खारजा नहर में बह गया था। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किए गए मजदूर राधेश्याम ने रात करीब ढाई बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उधर, दूसरे दिन शुक्रवार को भी मासूम संजय का कोई सुराग नहीं लग सका है। पहले दिन की भांति दूसरे दिन मासूूम की खोजबीन को प्रशासन की तरफ से औपचारिक प्रयास किए गए। मासूम की सुध लेने के लिए सुबह से ग्रामीण खारजा नहर पुल पर आते-जाते रहे। एसएचओ इंद्र सिंह ने बताया कि बच्चे की तलाश कराई गई, लेकिन कुछ पता नहीं लग सका है। मजदूर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
एक हादसे ने उजाड़ दी किरन की गृहस्थी
खारजा नहर पुल पर हुए हादसे के बाद कोई बाइक की तेज रफ्तार, तो कोई सिंचाई विभाग की ओर से पुल के पास टूटी रेलिंग का सुधार न करने की लापरवाही को हादसे की अहम वजह बता रहा है। इसको लेकर हर तरफ चर्चाएं तेज हैं। कारण कुछ भी हो, हकीकत यही है कि उक्त हादसे ने किरन देवी की खुशहाल गृहस्थी को उजाड़ कर रख दिया है। इकलौता बेटा संजय आंखों के सामने नहर में बह गया। अभी बेटे की जुदाई का गम कम नहीं हो सका था कि हादसे के वक्त घायल पति राधेश्याम की मौत ने उसको बदहवाश कर दिया है। मृतक राधेश्याम एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उससे एक बड़ा भाई राजेंद्र और एक छोटा भाई शिवकुमार है। उसके पास चार बीघा जमीन है। इसी पर खेती करने के साथ ही परिवार के भरण पोषण को वह मजदूरी करता था। बीते ढाई माह से उसकी पत्नी किरनदेवी अपने मायके ग्राम मुझा में रह रही थी। बृहस्पतिवार को पत्नी को घर लाने के लिए वह गांव के निवासी अपने मित्र रामौतार के साथ निकला। विदा कराकर सभी हंसी-खुशी घर आ रहे थे, कि परिवार के खुशनुमा माहौल हादसे से गमगीन हो उठा। बेटा और पति खोकर किरनदेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गांव में भी सन्नाटा पसरा है। हर कोई गमगीन परिवार के दुख में शामिल होकर ढांढस बंधाने में जुटा रहा। दिन भर मजदूर के घर के बाहर भीड़ लगी रही। परिवार के सामने समय बढ़ने के साथ ही नहर में बहने वाले मासूम की चिंता भी बढ़ती जा रही है।