सरकारी धन की बंदरबांट करना नगर पालिका के ठेकेदार को महंगी पड़ गई। 86 लाख की लागत से बनी स्टेडियम रोड के निर्माण में गड़बड़ी करने पर डीएम न ठेकेदार पर 10 लाख का जुर्माना डाला है। साथ ही टूट रहे सड़क को दोबारा ठीक कराने के आदेश दिए हैं।
नगर पालिका की ओर से कुछ माह पूर्व गौहनिया चौराहे से स्टेडियम रोड तक 86 लाख से सड़क का निर्माण कराया गया था। इसमें रोड के साथ दोनों ओर पेबरब्लाक से फुटपाथ भी बनाया जा रहा है। काम प्रारंभ होने के समय से ही इसमें घटिया सामग्री लगाने और मानक के अनुरूप गिट्टी, बजरी व कोलतार आदि न मिलने की शिकायत आने लगी थीं। लेकिन पालिका प्रशासन इस पर मौन रहा। परिणाम स्वरुप सड़क बनने के चंद दिनों बाद ही उखड़ने लगी।
इस पर शहरवासियों ने डीएम से शिकायत कर जांच कराने की मांग की थी। डीएम के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार शर्मा ने अभियंताओं के साथ मार्ग की जांच की। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली। सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई की संस्तुति कर डीएम को रिपोर्ट भेज दी।
रिपोर्ट के अध्ययन के बाद डीएम मासूम अली सरवर ने ठेकेदार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना डाला है। साथ ही टूट रहे मार्ग को ठीक कराने के आदेश दिए हैं। डीएम ने बताया कि यदि मार्ग की मरम्मत कर कमियों को दूर नहीं किया गया तो ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट भी किया जाएगा।
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जिम्मेदारों पर क्यों बरस रही कृपा?
सड़क निर्माण में ठेकेदार को विभागीय अभियंताओं के निर्देश में काम करना होता है। गौहनिया से सुगनढ़ी थाने तक बनी सड़क में भी अभियंताओं के निर्देशन में ही काम कराया गया। ऐसे में सवाल उठता कि आखिर ठेकेदार पर ही कार्रवाई क्यों हुई। संबंधित अभियंताओं अथवा इससे जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कृपा क्यों बरस रही है।