गांव बमरौली में हफ्ते भर पहले दो पक्षों के बीच हुई मारपीट में घायल हुए 50 वर्षीय श्रीपाल की मौत हो गई। पुलिस की लापरवाही देखिए कि घटना को हुए नौ दिन बीत गए, लेकिन तहरीर मिलने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जिंदगी और मौत से जूझते हुए जब उसकी शाहजहांपुर के एक अस्पताल में मौत होने की खबर पुलिस को मिली तो पुलिस ने आननफानन में तीन आरोपियों के खिलाफ मारपीट की एनसीआर दर्ज कर ली।
गांव बमरौली निवासी कलावती ने बताया कि 19 जनवरी को उनके पति श्रीपाल और गांव के ही सुक्खा सिंह के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था, जिसमें दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इस मारपीट में पति श्रीपाल और वह खुद घायल हुई थीं। अगले दिन दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराने की भी जरूरत नहीं समझी। घरवालों ने उसे और घायल पति को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया, लेकिन पति की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। 20 जनवरी को घर वाले पति को सीएचसी लाए। डॉक्टर द्वारा मजरूबी चिट्ठी मांगने पर परिवार के लोग थाने गए और वहां से मजरूबी चिट्ठी बनवाकर अस्पताल पहुंचे। तब डॉक्टर ने पति को भर्ती किया, लेकिन हालत दिन पर दिन बिगड़ती रही।
25 जनवरी को डॉक्टर ने सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन श्रीपाल की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे घरवाले परेशान हो उठे और 26 जनवरी को शाहजहांपुर के एक अस्पताल में ले जाकर पति को भर्ती कराया, जहां गुरुवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना जब परिवार वालों ने पुलिस को दी तो पुलिस के हाथपांव फूल गए।
पुलिस ने आननफानन में गुरुवार को ही श्रीपाल की ओर से गांव के ही सुक्खा सिंह, राजेंद्र, उसकी पत्नी लज्जावती और पुत्र अरनेश के खिलाफ मारपीट की एनसीआर दर्ज कर ली है। एसओ राजेश यादव से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि घायल को अधिक चोट नहीं थी। व्यस्तता के कारण एनसीआर दर्ज होने में चूक हुई। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एनसीआर को उचित धाराओं में तरमीम किया जाएगा। घर के मुखिया की मौत होने से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के एक पुत्र व पांच पुत्रियां हैं।