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एक और बंदी की संदिग्ध हालात में मौत

Fri, 15 May 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
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गुरुवार की देर शाम उसकी अचानक हालत खराब होने पर जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। उधर मृतक बंदी की पत्नी गुड्डी व पुत्र सोनू ने जेल अधीक्षक की शह पर जिला जेल में बंद एक आजीवन कारावास काट रहे कैदी पर पीटकर मार डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने एसपी को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
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गांव मुसैली में तीन साल पहले रंगीलाल की हत्या के आरोप में बीसलपुर पुलिस ने गांव निवासी रामप्रकाश, उसके भाई रामऔतार, रामासरे और पुत्र सोनू को 12 मार्च 2012 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों भाइयों व पुत्र जमानत पर छूट गए थे, लेकिन रामप्रकाश की जमानत नहीं हो सकी थी। जेल अधीक्षक विजय सिंह से जब बंदी की मौत के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उसे बैरक संख्या टू (ए) में रखा गया था। उन्हें बंदी के बीमार होने की जानकारी है, लेकिन बंदी की मौत कहां हुई, इसकी जानकारी जेल डॉक्टर ही दे सकते हैं। जिला कारागार के डॉ. नीरज कुमार के मुताबिक गुरुवार को बंदी रामप्रकाश ने सीने में दर्द होने की शिकायत की थी। जिस पर उसे दवा दी गई। उसके बाद उसकी हालत ठीक हो गई थी। गुरुवार शाम सात बजे उसने सिरदर्द व कमजोरी की बात बताई। इस पर उसे दवा और इंजेक्शन लगाया गया। देर शाम बंदी ने फिर सीने में दर्द होने की शिकायत की। जिस पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे जेल से रात 9.39 पर सिपाही हरिनंदन सिंह व होमगार्ड संजीव कुमार की अभिरक्षा में एबुंलेस से जिला अस्पताल भेजा गया। जहां 9.50 बजे डॉक्टर ने उसे ब्राड डेड (मृत अवस्था) घोषित कर दिया। शव का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ दो डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। उधर जेल प्रशासन की सूचना पर आधी रात के बाद बंदी के घर वाले जिला अस्पताल पहुंच गए। मृतक की पत्नी गुड्डी देवी ने एसपी को तहरीर देकर जेल अधीक्षक की शह पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी पर मारपीट करने, जेल डॉक्टर पर दवा न देने व इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
पिछले दस दिन के भीतर जिला जेल में संदिग्ध अवस्था में मरे इस दूसरे बंदी ने जेल प्रशासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब सवाल यह उठता है कि जब उसकी हालत खराब थी तो जेल प्रशासन ने उसे जेल अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराया? मौत कहां हुई जेल अधीक्षक को इस बात की जानकारी न होना भी खुद में एक सवाल है। बंदी की हालत खराब होने पर उसकी जानकारी घर वालों को न देना भी जेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।
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मृतक बंदी की पत्नी ने तहरीर दी है। तहरीर में लगाए गए आरोपों की जांच सीओ सिटी से कराई जाएगी। जांच में यदि आरोप सही मिलते हैं तो दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
जेके शाही, एसपी  


बीमार नहीं थे पति, जेल प्रशासन बोल रहा झूठ
पीलीभीत। जिला जेल में निरुद्ध बंदी रामप्रकाश की मौत से उसके घर में कोहराम मच गया है। मृतक की पत्नी गुड्डी देवी कहती हैं कि वह बुधवार को पति से मिलाई करने गई थी। तब पति बिल्कुल ठीक थे। गुरुवार को उनके वकील ने भी मुलाकात की थी। बोली-जेल प्रशासन बीमारी की बात कहकर झूठ बोल रहा है। गांव विसौली निवासी गुड्डी देवी ने बताया कि रंगीलाल हत्याकांड में पति रामप्रकाश, पुत्र सोनू व जेठ रामऔतार व रामासरे के जेल जाने के करीब छह महीने बाद वह गांव छोड़कर बरेली के भुता में किराए का मकान लेकर बच्चों के साथ रह रही है। बुधवार को उसने जेल में पति से मिलाई की थी और पांच सौ रूपये भी पति को दिए थे। उस समय वह बिल्कुल ठीक थे। कल उनके वकील भी मिलकर आए थे। वकील से पति ने कहा था कि बच्चों से कह देना की मुलाकात कर जाएंगे। कुछ पैसे भी साथ ले आएंगे। जेल से रात 10 बजे उन्हें फोन कर बताया गया कि पति की हार्टअटैक से मौत हो गई है। उसका आरोप है कि जेल प्रशासन की शह पर कैदी द्वारा की गई पिटाई से उसके पति की मौत हुई है। मृतक के सात पुत्रियां व तीन पुत्र हैं। जिनमें से बड़ी पुत्री के  ही हाथ पीले हो सकें हैं। बड़े पुत्र को छोड़कर सभी बच्चे छोटे-छोटे हैं।

आठ बीघा जमीन वह भी बिक गई
पति रामप्रकाश की मौत के बाद अब बच्चों के  पालन पोषण का जिम्मा गुड्डी देवी के कंधों पर आ गया है। वह बतातीं हैं कि आठ बीघा जमीन थी। आय का कोई साधन नहीं था। इस वजह से जमीन बेचकर पुत्र और दोनों जेठों की जमानत कराई। अब उसके पास बिसवा भर भी जमीन नहीं है। वह अपने बच्चों की कैसे परवरिश करेगी। इस बात को लेकर वह काफी परेशान है।

साथी बंदी ने डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोप
जिस बैरक में मृतक रामप्रकाश बंद था। उस बैरक के उसके साथी ने मृतक के पुत्र सोनू को कचहरी हवालात में एक पत्र दिया है। जिसमें कहा है कि रामप्रकाश की 11 मई से तबियत खराब चल रही थी। उस दिन भी उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उल्टी सीधी दवाई देकर जेल डॉक्टर ने भगा दिया था। बाहर अस्पताल भेजने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की थी।

कैदी पर लगा प्रताड़ित करने का आरोप  
गुड्डी देवी बताती हैं कि मृतक रंगीलाल का एक रिश्तेदार भी जिला कारागार में कैदी है। वह पति को मारपीट कर प्रताड़ित करता था। वह जब मिलाई करने जाती थी तो यह बात पति उसे बताते थे। कहते थे कि जेल वालों की मदद से कथित कैदी मुझे मार डालेगा। उसने जेल के अधिकारियों से भी शिकायत की थी। जेल वाले भी पति को डांट देते थे।
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