दलित युवती का सदर तहसील से अपहरण नहीं हुआ था बल्कि उसने अपने बाबा से मिलकर अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी थी। मंशा पड़ोसियों को अपहरण के मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की थी। पुलिस ने युवती से जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने अपने अपहरण की कहानी का सच बयां कर दिया।
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव अलकथान निवासी एक वृद्ध ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि मंगलवार को सदर तहसील से उसकी पोती का अपहरण हो गया है। हालांकि पुलिस शुरूआत से ही घटना को संदिग्ध मान रही थी। लिहाजा उसने सच सामने लाने की कोशिश भी नहीं की। गुरुवार सुबह अचानक घरवालों और कुछ अन्य लोगों के साथ युवती खुद सीओ सिटी के कार्यालय पहुंची और अपने अपहरण की कहानी को सच साबित करने की कोशिश की। शुरूआती पूछताछ में उसने तीन अज्ञात लोगों द्वारा अपहरण कर नवाबगंज के एक मकान में रात भर बंधक बनाकर रखने की बात कही। कहानी में कई झोल होने पर सीओ ने युवती को महिला एसओ अनुपमा सिंह के हवाले कर सख्ती से पूछताछ करने को कहा। पूछताछ के बाद शुक्रवार को पुलिस ने युवती के अपहरण की कहानी का सच सामने ला दिया। पुलिस ने बताया कि युवती ने पुराने विवाद को लेकर पड़ोसी को अपहरण के झूठे केस में फंसाने के लिए अपने बाबा के साथ मिलकर नाटक किया था। वह गंगापुर गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर जाकर ठहर गई थी। उसका अपहरण नहीं हुआ, न ही वह नवाबगंज की ओर गई।
पुलिस ने क्यों नहीं कराए कोर्ट में बयान
घटना को फर्जी करार दे भले ही पुलिस राहत महसूस कर रही हो, लेकिन अभी भी लापरवाही के आरोप पुलिस पर लग रहे हैं। चर्चित मामला होने के बाद भी पुलिस ने इसमें कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए। पुलिस ने न तो युवती के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई और न ही उसके कोर्ट में बयान दर्ज कराए। पहले तो लड़की के अपहरण की तहरीर मिलने पर रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई और अब जब मामला फर्जी पाया गया है तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
पड़ोसियों को फंसाने के लिए युवती ने बाबा के साथ मिलकर अपहरण की झूठी कहानी रची थी। वह अपने एक रिश्तेदार के घर रुकी थी। युवती और उसके बाबा को सख्त चेतावनी देकर छोड़ा गया है। मामला पूरी तरह से फर्जी साबित हुआ है। युवती बयान दर्ज कर उसे भविष्य में ऐसा न करने का वादा करने पर छोड़ा गया है।
- निर्मल विष्ट, सीओ सिटी