समाज में भेदभाव का एक और मामला प्रकाश में आया है। हौसला पोषण के तहत एक आंगनबाड़ी केंद्र पर बना खाना 18 गर्भवती महिलाओं ने इसलिए नहीं खाया, क्योंकि इसे बनाने वाली कार्यकत्री दलित है।
राज्य पोषण मिशन के तहत शुरू हुई हौसला पोषण योजना से कुपोषण कितना दूर होगा यह समय बताएगा, लेकिन इससे जिले में नया विवाद खड़ा हो गया। अमरिया ब्लाक के धनकुना गांव में योजना के शुभारंभ के दिन बुधवार को खाना ही नहीं बन सका था। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को गांव के दोनों केंद्रों पर खाना बनाया गया, लेकिन एक केंद्र पर पहुंचीं पंजीकृत सभी 18 महिलाओं ने खाना खाने से यह कहकर इंकार कर दिया कि खाना दलित महिला के हाथ का बना हुआ है। वहां मौजूद अन्य कार्यकत्री, महिलाओं एवं गांव के लोगों ने समझाने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी और महिलाएं लौट गईं। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकपूर को फोन पर दी। इस पर उन्होंने अमरिया परियोजना कार्यालय से स्टाफ को भेजा। प्रधान के सहयोग से प्रयास किए गए, लेकिन महिलाएं खाना खाने को तैयार नहीं हुई।
महिलाओं को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वे खाना खाने को तैयार नहीं हुईं। शुक्रवार को फिर प्रयास किया जाएगा।
रईस अहमद, ग्राम प्रधान
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18 महिलाओं के खाना न खाने की जानकारी मिली है। जानकारी करने पर पता चला है कि अधिकांश महिलाएं अशिक्षित हैं। शुक्रवार को गांव पहुंचकर उन्हें समझाया जाएगा।
राजकपूर, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो गलत है। मामले की जांच कराई जाएगी।
- मासूम अली सरवर, जिलाधिकारी