बराही रेंज के जंगल क्षेत्र में नेपाल जाने वाले रास्ते पर शारदा नदी के कंजरिया घाट के निकट पकड़े गए दो शिकारियों से वन विभाग ने बाघ की हड्डियां बरामद की हैं। हड्डियां कहां से आईं और बाघ को मारा गया था? यह अभी रहस्य बना हुआ है। वन्यजीव अपराधों पर नजर रखने वाली एसटीएफ की सूचना पर बराही रेंज के वन कर्मियों ने टाइगर रिजर्व के एसडीओ केपी सिंह के नेतृत्व में कंजरिया घाट के समीप नाकेबंदी कर दो शिकारियों को पकड़ने का दावा किया। इनमें एक पताबोझी निवासी छोटेलाल और दूसरा पिपरिया जयभद्र निवासी संतोष गिरी उर्फ कल्लू है। शिकारियों के पास मिले पैकट में बाघ की हड्डियां बरामद हुईं। पूछताछ के दौरान दोनों शिकारियों ने अपने तीन अन्य साथियों के फरार होने की जानकारी दी। इनमें पताबोझी का बालकिशन और नहरोसा का फरयाद व मुश्ताक हैं। वन विभाग अफसरों के मुताबिक ये तीनों पूर्व में बाघ का शिकार करने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। अब दुबारा गिरोह बनाकर इस अवैध धंधे में लगे हैं। पकड़े गए दोनों शिकारियों ने वन विभाग की टीम को यह नहीं बताया कि बाघ को कब और कहां मारा गया था? फिलहाल यह मामला एक तरह से रहस्य बन गया है। रेंजर अनिल शाह ने बताया कि फरार शिकारियों की तलाश की जा रही है। बाघ कहां मारा गया था, और उसकी हड्डियां कहां से लाई गई, बाघ के शेष अंग कहां हैं यह फरार आरोपियों के पकड़े जाने पर पता चल सकेगा।