जिले में भाजपा नेताओं और अधिकारियों के बीच शुरू हुई रार थमने का नाम नहीं ले रही। जिले के दो विधायकों द्वारा खफा होने का मामला अभी शांत भी नहीं हो सका था कि शुक्रवार पालिका कर्मचारियों की शिकायत करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं की बीसलपुर के एसडीएम और तहसीलदार से नोकझोंक हो गई। बाद में भाजपा विधायक ने दोनों पक्षों को समझाकर का मामला शांत करा दिया। बीसलपुर भाजपा नगराध्यक्ष अमित अग्रवाल शुक्रवार को अपने कुछ साथियों को लेकर एसडीएम जेपी चौहान से पालिका कर्मचारियों की शिकायत करने पहुंचे थे। अमित का आरोप था कि पालिका कर्मचारियों ने रैपिड सर्वे के दौरान नगर में पिछड़ी जाति की जनसंख्या 96 फीसदी दर्शा दी है, जबकि ऐसा नहीं है। एसडीएम ने इस सिलसिले में फोन कर नगर पालिका परिषद के ईओ सुरेंद्र प्रताप को बुला लिया। एसडीएम इस संबंध में ईओ से कड़ी नाराजगी जताने लगे, जिसकी एक भाजपा कार्यकर्ता वीडियो बनाने लगा। मौके पर मौजूद तहसीलदार विवेक मिश्रा ने कार्यकर्ता से वीडियो न बनाने को कहा, फिर भी कार्यकर्ता वीडियो बनाता रहा, तभी तहसीलदार ने उस कार्यकर्ता का मोबाइल फोन छीन लिया। यह बात अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को काफी नागवार लगी। इसी पर दोनों पक्षों में काफी कहासुनी हो गई।
आरोप है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार की शान के खिलाफ भी कुछ बातें कह डाली। जानकारी होने पर भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने तत्काल मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझा बुझा शांत कर दिया। इस मौके पर भाजपा नगर उपाध्यक्ष आयुष मिश्रा, भाजपा स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के जिला संयोजक राकेश गंगवार, गौरव मिश्रा, राहुल बाल्मीकि, संजीव नाथ अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, देवेश सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने एसडीएम पर अपने साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया, लेकिन एसडीएम ने इस आरोप का खंडन किया है। यह मामला तहसील परिसर में पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।