पीलीभीत। बाजार से सटे इलाके मोहल्ला डोरीलाल की बेबी मार्केट की तीसरी मंजिल पर बने कमरे में किराए पर रह रहे गोविंद अग्रवाल की रसोई सिलिंडर में आग लगने से जलकर हुई मौत की खबर कुछ ही देर में पूरे शहर में फैल गई। जिसने भी सुना मौके पर पहुंचा। इससे वहां खासी भीड़ जमा हो गई। हर कोई सराफ की मौत को पर अफसोस जता रहा था। सबसे ज्यादा चर्चा में बेटे से गोविंद की तल्खियां रहीं। लोगों का कहना था कि घर में कोई और होता तो गोविंद अग्रवाल की जान बच सकती थी।
सराफ गोविंद अग्रवाल की खाना बनाते हुए घर की रसोई में जलकर हुई मौत के पीछे उनका अकेला होना भी अहम वजह रहा है। उनकी पत्नी की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। बेटी प्रणिका अग्रवाल की शादी हो चुकी है। वह अपनी ससुराल असम में है। इकलौते बेटे प्रियांश और उनके बीच बनती नहीं थी। जिस वजह से दोनों अलग-अलग रहते थे। घटना के समय भी उनके साथ घर पर कोई मौजूद नहीं था, वहीं मकान का दरवाजा बंद होने से आसपास के लोगों को भी जानकारी नहीं हुई। नतीजतन आग की चपेट में आने के बाद भी समय रहते कोई बचाव नहीं हो सका। अगर कोई साथ होता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
बृहस्पतिवार शाम को दुकान से घर पहुंचने के बाद सराफ गोविंद अग्रवाल ने कमरा भीतर से बंद कर लिया था। वह रसोई में खाना बना रहे थे और आग की चपेट में आ गए। आग की भीषणता का अंदाजा इसी बात से भी लगाया जा सकता है कि उसने गोविंद को बच निकलने का मौका ही नहीं दिया। वह रसोई से दस कदम से भी कम दूरी पर दरवाजे तक नहीं पहुंच पाए। रसोई में सिलिंडर के पास ही उनका शव पड़ा मिला। यह कहना गलत नहीं होगा कि आग की चपेट में आने के बाद वह चीखे-चिल्लाए भी होंगे, लेकिन कमरा बंद होने की वजह से उनकी आवाज बाहर तक नहीं पहुंच सकी। यही कारण रहा कि पड़ोसियों को भी हादसे की भनक तब लगी जब बंद मकान से धुएं का गुबार निकला। यह देख पड़ोसियों ने शोर मचाया। बाजार से सटा होने के कारण कुछ ही देर में लोग जमा हो गए। मकान के निचले हिस्से में बनी दुकानों के अलावा आसपास के व्यापारी भी मौके पर पहुंच गए। पहले दरवाजा खुलवाने की कोशिश की गई। इस बीच भीतर से धीमी आवाज भी सुनाई दी। लोग दरवाजा तोड़कर भीतर घुस गए, लेकिन अंदर जो मंजर देखा तो सभी सिहर गए। सिलिंडर से लपटें निकल रही थीं। जमीन पर सराफ गोविंद का शव पड़ा था। हालांकि आग कमरे तक नहीं पहुंची। सिर्फ सिलिंडर और रसोई का कुछ सामान ही चपेट में आया। लिहाजा दमकल के आने से पहले ही लोगों ने आग बुझा ली। सिलिंडर भी रसोई से निकालकर बाहर रखा जा चुका था। जिसने भी हादसे को सुना, वह मौकेपर पहुंचने लगा। जिसके चलते कुछ ही देर में भीड़ लगी रही। आलम यह रहा कि आसपास के कई मकानों की छतों पर भी लोग जमा रहे।
साथी व्यापारियों संग दिन में करते रहे थे व्यापार पर चर्चा
हादसे की खबर मिलने के बाद मौके पर सराफा एसोसिएशन के जिला महामंत्री शैली अग्रवाल समेत कई व्यापारी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को दिन भर गोविंद अग्रवाल दुकान पर रहे थे। शाम को घर आने से पहले वह काफी देर तक उनकी दुकान पर बैठकर साथी व्यापारियों से बातचीत करते रहे। इसमें सराफा व्यापार में हो रहे उतार-चढ़ाव को लेकर भी सभी की आपस में चर्चा होती रही थी। शाम करीब साढ़े चार बजे गोविंद उनके पास से उठकर घर के लिए निकल गए थे।
पिता का शव देख छलक आए प्रियांश के आंसू
भले ही पिता-पुत्र के बीच बनती न हो। वह एक दूसरे से अलग रहते थे, लेकिन जब प्रियांश को हादसे की खबर स्थानीय लोगों से फोन पर मिली तो, वह कुछ ही देर में मौके पर अन्य लोगों के साथ पहुंच गया। पिता की मौत की उसको पहले जानकारी नहीं थी। मौके पर पहुंचने के बाद जब उसने पिता के शव को देखा तो उसकी आंख से आंसू छलक आए। साथी व्यापारियों ने उसको ढांढस बंधाया। इसके बाद उसने रिश्तेदारों को फोन कर पिता की मौत की जानकारी दी।