डकैती का घटनाओं का आधा-अधूरा खुलासा कर फजीहत झेल रही रही पुलिस का रवैया इस मामले में शुरू से ही लापरवाही वाला रहा है। सही वर्कआउट करने के दावे तो बहुत हुए, लेकिन धरपकड़ के नाम पर सिर्फ खोपड़ा पर ही फोकस किया गया। दो बार हुए खुलासे में बरामदगी को लेकर तो सवाल खड़े हुए ही। अब खोपड़ा गैंग के सदस्यों की संख्या को लेकर पुलिस कठघरे में है। पुलिस गैंग के 28 सदस्ययों को अभयदान दे चुकी है। यह बात दीगर है कि अफसरों ने भी मातहतों के इस खेल को नजर अंदाज करने में ही भलाई समझी।
पिछले दिनों जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में डकैती की ताबड़तोड़ घटनाएं हुई थीं। इनमें पुलिस ने लखीमपुर खीरी के भीरा क्षेत्र के 12 हजार रुपये के इनामी बदमाश लखपत उर्फ खोपड़ा गैंग का हाथ बताकर उसकी तलाश शुरू की। पहले पुलिस ने 17 जून को एक खुलासा किया। इसमें पुलिस ने शातिर बदमाश खोपड़ा का साथी बताते हुए तीन बदमाशों बीसलपुर के रसियाखानपुर निवासी बाबू, अलीशेर और पूरनपुर क्षेत्र के रजागंज निवासी अलीजान को जेल भेजा। उन पर पांच घटनाएं भी खोल दीं। इस दौरान यह भी बताया कि खोपड़ा के अलावा 25 बदमाश हैं, जो घटनाओं में बदल-बदल कर शामिल रहे। ये सभी अभी फरार हैं, हालांकि मुकदमे में उनको अज्ञात के तौर पर भी शामिल नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस शांत हुई तो दुबारा घटनाएं होने लगीं। इसके बाद तीन दिन पहले पुलिस ने खोपड़ा समेत पांच बदमाशों की गिरफ्तारी मुठभेड़ के बाद करने का दावा किया। जबकि घटनाओं को आठ से दस बदमाशों ने अंजाम दिया था। इस बार भी तीन साथियों को पुलिस भूल गई। बरामदगी भी निल रही, साथ ही गैंग के तीन साथियों को भी अनदेखा कर अभयदान दे दिया गया। खास बात यह है कि बरामदगी के आधार पर वर्क आउट की सत्यता भांपने वाले एसपी मुनिराज खुद इनाम देकर अधूरी सफलता पर पुलिस की सराहना कर गए। सवाल है कि आखिर पहले 25, अब तीन बदमाशों को मुकदमे में पुलिस ने शामिल क्यों नहीं किया है। इसका जवाब देने से खुद अफसर बच रहे हैं।
पिछले खुलासे में भी हुई थी पुलिस की किरकिरी
खोपड़ा गैंग के तीन साथियों को पकड़कर पुलिस ने 17 जून को भी पांच डकैतियों का खुलासा किया था। इसमें भी बरामदगी को लेकर उसकी फजीहत भी हुई थी। गजरौला के पुरवा गांव के पीड़ित ने बरामद किए जेवरात के असली होने पर सवाल खड़ा किया था। इसके अलावा बीसलपुर के एसओ केपी सिंह ने तो लाखों की वारदात को एक हजार से भी कम रुपये की बरामदगी दिखाकर खोल दिया था। इसकी शिकायत भी तत्कालीन एसपी अनिल सिंह से की गई थी, लेकिन अफसरों ने भी मातहतों का ही साथ दिया और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
क्या है जेवरात सील होने का सच
तीन दिन पहले पांच बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बरामदगी के नाम पर सिर्फ असलहा और टार्च बरामद की थी। यही प्रेसवार्ता के दौरान मीडिया को बताया गया। सूत्रों की मानें तो बदमाशों की धरपकड़ के बाद न्यूरिया थाने में जेवरात सील किए गए लेकिन उनके बारे में नहीं बताया गया। यह मामला भी पहेली बना हुआ है।