पीलीभीत। जहानाबाद इलाके के कुकरीखेड़ा गांव में होली के दिन दो समुदायों के बीच बवाल के पीछे रही पुलिस की चूक को आला अफसर भले दबाने की कोशिश में लगे हों, लेकिन अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उनमें पुलिस की लापरवाही ही सामने आ रही है। दोनों समुदायों के लोगों का साफ कहना है कि होली के दिन बवाल से पहले गांव में एक भी पुलिसकर्मी नहीं था। पुलिस झगड़े के बाद ही गांव में पहुंची थी। दोनों पक्षों के लोग अफसरों की ओर से पुलिस की तैनाती के दावे को झुठला रहे हैं। उनका साफ कहना था कि अगर पुलिस पहले से मौजूद होती तो झगड़ा शुरूआत में कंट्रोल किया जा सकता था। अधिकारी इस पूरे मामले में पुलिस का बचाव करने में जुटे हैं।
जहानाबाद थाना क्षेत्र के कुकरीखेड़ा गांव में होली के लिए दो समुदायों के बीच मारपीट और पथराव हुआ था। बवाल के दौरान जयप्रकाश की हत्या कर दी गई थी। इसमें गुड्डू, सुभाष, राजऋषि, पिंटू और छेदालाल घायल हुए थे। इस मामले में जयप्रकाश के भतीजे गुड्डू की ओर से बलवा, जानलेवा और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस इसमें नामजद आरोपी साबिर और शाकिर को गिरफ्तार कर चुकी है। शनिवार को बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने अतिसंवेदनशील होने के बावजूद पुलिस की तैनाती न होने की बात कही। उनका कहना था कि विवाद के बाद सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद पुलिस गांव पहुंची। हालांकि अफसर कुकरखेड़ा में पहले से पुलिस तैनात होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि अफसरों से लेकर थाना प्रभारी तक यह नहीं बता पा रहे हैं कि होली के दिन बवाल से पहले कुकरीखेड़ा में किन पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी थी। सवाल यह है कि जिन पुलिस कर्मियों की ड्यूटी थी तो वे मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे? अगर मौजूद थे तो बवाल इतना कैसे बढ़ गया? सूत्रों के मुताबिक कुकरीखेड़ा के लिए अलग से पुलिस तैनात नहीं थी। आसपास के इलाकों के साथ ही कुकरीखेड़ा में भी गश्त के दौरान नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। इसी वजह से पुलिस गांव से नदारद थी। चूंकि उनके ऊपर अन्य इलाकों पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी। फिलहाल अब इसको लेकर अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं।