पीलीभीत। शासन की सख्ती के बाद प्रशासन ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ध्यान योग केंद्र के बाद अब डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर फोर्स लेकर मदीना शाह मोहल्ले में पहुंचीं एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी ने बड़ी कार्रवाई की। यहां 40 साल बाद वक्फ बोर्ड की करीब पांच बीघा जमीन पर बनाई गईं दुकानें और घरों को जेसीबी से ध्वस्त करा दिया गया। सुबह नौ बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर तक जारी रही। इस दौरान काफी भीड़ जुट गई। कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन उनकी एक नहीं चली।
शहर के मोहल्ला मदीना शाह में वक्फ बोर्ड की करीब पांच बीघा बेशकीमती जमीन है। इस पर करीब 40 सालों से लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। जमीन के पीछे की साइड में पक्के मकान बना लिए गए थे। कई डेयरियां भी संचलित थीं। रोड की तरफ कई बिल्ड़िंग मेटेरियल की दुकानें खोलकर जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। वक्फ बोर्ड की इस जमीन को खाली कराने के लिए वैसे तो लंबे समय से शासन और प्रशासन स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन पालिका प्रशासन की मेहरबानी के चलते जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो सकी। पिछले दिनों सभासद सलमा अनवर ने इस प्रकरण की शिकायत डीएम वैभव श्रीवास्तव से की। इसमें गोबर की आड़ में कई बीघा जमीन पर अवैध कब्जा करने की बात कही गई। कहा गया कि गंदगी और गोबर की दुर्गंध से मोहल्ले में लोगों का जीना मुहाल है। इस पर डीएम ने एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी को नगर पालिका ईओ के साथ मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए। जांच में जमीन वक्फ बोर्ड की पता चलने पर रविवार को एसडीएम सदर ने लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट कर कब्जेदारों को 24 घंटे के भीतर खुद कब्जा हटा लेने का अल्टीमेटम दिया, लेकिन स्थिति जस की तस रही। सोमवार को एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी, तहसीलदार विवेक मिश्रा, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मो. खालिद, सुनगढ़ी एसओ एसपी सिंह और नगर पालिका की टीम जेसीबी लेकर कार्रवाई करने पहुंचे तो खलबली मच गई। जेसीबी से दुकानें ध्वस्त करा दी गईं। रेता-बजरी को कई बीघा जगह में फैला दिया गया। 40 साल से जिस जमीन को कब्जा मुक्त कराने में नगर पालिका परिषद के अधिकारियों का पसीना छूटा रहा था उसे प्रशासन ने चंद घंटों में कब्जामुक्त करा दिया।
नगर पालिका की खुली पोल तो भाग गए कर्मचारी
40 साल से जमीन पर कब्जा था। दिनों दिन इस पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा था। इसको लेकर पूर्व में कई बार शासन स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन पालिका प्रशासन की मेहरबानी के चलते कब्जा नहीं हट सका था। बताया यह भी गया है कि पालिका के कर्मचारी रेता बजरी की दुकान चलाने वालों से महीना वसूलते थे। इसी आड़ में उनका कारोबार फल फूल रहा था। इस मामले में पालिका में नजूल की भूमि से संबंधित कार्य देखने वाले एक क्लर्क की मिलीभगत सामने आने पर एसडीएम सदर का पारा चढ़ गया। उन्होंने क्लर्क की मौके पर ही जमकर फटकार लगाई। अपनी पोल खुलते देख पालिका के कई कर्मचारी मौके से खिसक लिए।
तीन बार दिया नोटिस फिर भी नहीं चेते अतिक्रमणकारी
अफसरों की ओर से मामला संज्ञान में आने पर पूर्व में वक्फ बोर्ड की जमीन खाली करने को लेकर तीन बार अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा गया। इसके अलावा उनको सख्त चेतावनी भी दी गई। फिर भी कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन ने शिकंजा कसते हुए कार्रवाई करा दी। अतिक्रमण नहीं हटने की वजह नगर पालिका कर्मियों की कब्जा करने वालों से साठगांठ होना बताई जाती है।
एसडीएम का चढ़ा परा तो खुद हटाया अतिक्रमण
अतिक्रमण हटाने के दौरान एक जेसीबी के मौके पर पहुंचने और निर्माण ध्वस्त करने में हीलाहवाली होने पर एसडीएम सदर का पारा चढ़ गया। नगर पालिका से एक और जेसीबी मंगाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी करीब 15 मिनट तक जेसीबी मौके पर नहीं पहुंची तो एसडीएम ने पालिका के जेई और सफाई निरीक्षक की फटकार लगा दी। एसडीएम ने कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा कराने की खुली छूट दे रखी थी, अब कार्रवाई की नौबत आई तो पीछे हट रहे हो। यह देख कुछ अतिक्रमणकारी खुद ही अतिक्रमण हटाने में जुट गए। एसडीएम अतिक्रमण पूरी तरह हटने तक मौके पर डटी रहीं।
रेता बजरी से पाट दी गई जमीन
वक्फ बोर्ड की जमीन पर छह से अधिक बिल्ड़िंग मैटेरियल की दुकान अस्थायी तौर पर संचलित थी। इनके बाहर रेता बजरी के कई बड़े ढ़ेर लगे थे। करीब पांच ट्रक बजरफुट, तीन ट्रक नदी का रेता और पांच ट्रक बजरी पड़ी होने पर एसडीएम, तहसीलदार आदि ने जेसीबी से इसे समतल करा दिया। रेता बजरी से वक्फ बोर्ड की कुछ खाली पड़ी जमीन पाटी गई। दोपहर में जमीन की चारों ओर रेता बजरी ही दिखाई देता दिख रहा था।
खूब चला जनप्रतिनिधियों की सिफारिश का दौर
डीएम के निर्देश पर वक्फ बोर्ड की जमीन को खाली कराने एसडीएम फोर्स के साथ पहुंचीं तो खलबली मच गई। इसका पता चलने पर जनप्रतिनिधि भी अतिक्रमण करने वालों पर रहम बरतने की सिफारिश करने से नहीं चूके। एसडीएम सदर ने कार्रवाई के दौरान भले ही अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया लेकिन उनके साथ चल रहे अफसरों व पुलिस कर्मियों के फोन घनघनाते रहे।
महज सात दिन में हुई कार्रवाई बनी चर्चा का विषय
डीएम वैभव श्रीवास्तव से इस मामले की शिकायत सात दिन पहले की गई थी। इसे गंभीरता से लिया गया। एसडीएम को ईओ की जांच में सभासद की ओर से की गई शिकायत ठीक मिलने पर कार्रवाई कर दी गई। 40 साल से जिस जमीन पर कब्जा था, उसे महज सात दिन में खाली करा देने का मामला चर्चा का विषय बन गया।
चालीस साल से वक्फ बोर्ड की जमीन पर अवैध तरीके से लोगों ने कब्जा कर रखा था। कई सालों से जमीन खाली कराने के लिए पत्राचार चल रहा था। लेकिन अवैध कब्जों से जमीन को मुक्त नहीं कराया जा सका था। जिला प्रशासन की यह बड़ी कार्रवाई है। पूर्व में रहे अफसर अगर गंभीर होते तो वक्फ बोर्ड की जमीन से कब्जा हट चुका होता।
-मो. मियां अंसारी, मुतवली, वक्फ बोर्ड, अध्यक्ष
योगी सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि वक्फ बोर्ड की जमीन कब्जामुक्त होगी। कब्जा करने वालों से कई बार जमीन खाली करने का अनुरोध किया गया, लेकिन वह अवैध कब्जा हटाने को तैयार नहीं थे। कई बार तो लड़ाई की नौबत आ गई। अब लोगों को भी काफी राहत मिलेगी।
- मो. रियान, सचिव, वक्फ बोर्ड
डीएम के निर्देश पर तहसीलदार, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी आदि के साथ पहुंचकर वक्फ बोर्ड की पांच बीघा जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त करा दिया है। अतिक्रमण करने वालों को पूर्व में जमीन खाली करने की हिदयत दी थी। अब अगर अतिक्रमण दोबारा किया तो एफआईआर कराई जाएगी। कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। - वंदना त्रिवेदी, एसडीएम सदर