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ब्रह्मदेव बाबा मंदिर में मूर्तियां क्षतिग्रस्त कीं, रोष

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पूरनपुर (पीलीभीत)। एक बार फिर असामाजिक तत्वों ने फिजा खराब करने की कोशिश की। इस बार असम हाईवे से सटे ब्रह्मदेव बाबा मंदिर में घुसकर दो मूर्तियां क्षतिग्रस्त कर दी गईं। जानकारी मिलने पर काफी लोग जमा हो गए और घटना पर नाराजगी जताई। पुलिस से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस पर पुलिस ने घटना के जल्द वर्कआउट का भरोसा तो दिलाया, लेकिन अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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असम हाईवे पर चीनी मिल के पास ब्रह्मदेव बाबा का मंदिर है। यहां पर पुवायां (शाहजहांपुर) के ग्राम नाहिल निवासी सोनू बतौर पुजारी रहते हैं। शनिवार रात को शरारती तत्वों ने मंदिर में लगी नंदी महाराज और नाग देवता की मूर्तियां क्षतिग्रस्त कर दीं। रविवार सुबह सफाई करने के लिए पुजारी सोनू बाहर आए तो उनकी नजर क्षतिग्रस्त मूर्तियों पर पड़ी। जानकारी मिलने पर कुछ ही देर में चीनी मिल के जीएम एसके अग्रवाल, कर्मचारी अजय, सर्वेश शुक्ला, रघुनाथ सिंह, वेद प्रकाश त्रिवेदी, गांव पिपरिया दुलई निवासी किसान नेता लालू मिश्रा समेत काफी लोग जमा हो गए और घटना की निंदा करते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई। इसकी सूचना पुलिस को तुरंत दी गई, लेकिन रविवार को मौके पर पुलिस नहीं पहुंची। दूसरे दिन सोमवार को कोतवाली पुलिस हरकत में आई और मौका मुआयना किया। लोगों को सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाकर शांत कराया गया। शाम को स्थानीय लोगों ने क्षतिग्रस्त मूर्तियों को बदलवाकर सुधार कार्य शुरू कर दिया है।

धार्मिक स्थल में हुई वारदात पर भी संजीदा नहीं हुई पुलिस
पूरनपुर (पीलीभीत)। एक तरफ पुलिस अधिकारी धार्मिक मामलों को लेकर पुलिस को तत्काल कार्रवाई का पाठ पढ़ा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अफसरों के इन आदेशों का थाना स्तर पर कोई मायने ही नहीं रह गया है। पूरनपुर में चीनी मिल के पास धार्मिक स्थल की मूर्तियां क्षतिग्रस्त करने जैसे संवेदनशील मामले में भी कोतवाली पूरनपुर पुलिस पूरी तरह से लापरवाह बनी रही।
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रविवार सुबह इस घटना की सूचना पुजारी के अनुसार पुलिस को दी गई थी, लेकिन पुलिस को मौके पर पहुंचने में 24 घंटे का समय लग गया। पहले दिन कोई भी पुलिसकर्मी घटना की जानकारी करने के लिए नहीं पहुंचा। दूसरे दिन सोमवार को जब लोगों ने मीडिया को सूचना देना शुरू कर दी, तब जाकर पुलिस हरकत में आई। इसके अलावा दो दिन बीतने के बाद भी इस मामले में पुलिस की ओर से रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब मौके पर जांच करने के बाद भी आरोपी का पता लगाकर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस इसको मानसिक मंदित की करतूत बताने में लग गई है, जबकि पुजारी और आसपास के कई लोग इसे असमाजिक तत्वों की शरारत बता रहे हैं।

पहले भी बनाया जा चुका है धार्मिक स्थलों को निशाना
धार्मिक स्थलों को इससे पहले भी कई बार निशाना बनाया जा चुका है। जून के पहले हफ्ते में बीसलपुर के रोहनिया गांव में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर हुए विवाद में एक धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की गई थी। इसमें पांच लोग जेल भेजे गए थे। मार्च में अमरिया के एक धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

कोतवाल बोले- रविवार को नहीं मिली थी सूचना
कोतवाल केशव कुमार तिवारी का कहना है कि रविवार को उनकेे पास मंदिर में मूर्तियां क्षतिग्रस्त करने की कोई सूचना नहीं आई थी। सोमवार को इसका पता लगने पर मौका मुआयना कर पड़ताल की गई है। मंदिर हाईवे पर है, यहां से हर समय वाहनों का आवागमन रहता है। प्रथम दृृष्टया मामला किसी मानसिक मंदित द्वारा घटना को अंजाम देना प्रतीत हो रहा है। जांच कराई जा रही है, सख्त कार्रवाई होगी।

पुजारी बोले- रविवार को ही देदी थी पुलिस को सूचना
मंदिर के पुजारी सोनू ने इस घटना को सीधे तौर पर शरारत करार दिया है। उनका कहना है कि रविवार सुबह जब वह मंदिर परिसर की साफ-सफाई करने के लिए उठे तब उनको इसकी जानकारी हुई थी। इसके तुरंत बाद ही चीनी मिल कर्मचारियों और पुलिस को सूचना दे दी थी। रविवार को पुलिस मौके पर पहुंची ही नहीं। यह भी बताया कि जिस दरोगा को उन्होंने सूचना दी थी, उसका मोबाइल नंबर भी उनके पास है।

मुझे घटना की जानकारी नहीं है। न पुलिस ने इस बारे में अब तक मुझे कुछ बताया है और न ही पब्लिक ने कोई सूचना दी है। मामले की जानकारी कर कार्रवाई कराई जाएगी। -कमल सिंह, सीओ पूरनपुर
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