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मछली तस्करों की सक्रियता से इंडो-नेपाल बाॅर्डर की सुरक्षा को खतरा

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पीलीभीत/माधोटांडा। इंडो-नेपाल सीमा की सुरक्षा में लगी एसएसबी ने शारदा नदी से हो रहे रेत के अवैध खनन पर तो रोक लगा दी है, लेकिन नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी क्षेत्र से मछली की तस्करी टाइगर रिजर्व के रास्ते अब भी जारी है। इससे सीमा की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
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इंडो- नेपाल सीमा से सटे इलाके से होकर बह रही शारदा नदी कई मामलों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहती है। भारत और नेपाल आने-जाने का प्रमुख रास्ता भी शारदा नदी से होकर ही जाता है। कुछ माह से रमगरा से लेकर नौजल्हा क्षेत्र तक शारदा नदी से रेत और बजरी का खनन किया जा रहा था। इसकी जानकारी एसएसबी अफसरों को हुई तो उन्होंने शारदा नदी से हो रहे अवैध खनन पर रोक लगा दी। हालांकि नेपाली तस्कर जंगल के रास्ते से भारतीय क्षेत्र में मछली की सप्लाई अब भी कर रहे हैं।
अवैध मछली निकासी पर रोक न लगने से उठने लगीं उंगलियां
रेत के खनन पर रोक के बाद अब मछली का अवैध शिकार शुरू हो गया है। खास बात यह है कि यह मछली का अवैध शिकार तो नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी में किया जाता है, लेकिन मछली की सप्लाई टाइगर रिजर्व के रास्ते भारत में की जा रही है। टाइगर रिजर्व में अवैध मछली की निकासी पर रोक न लगने से उंगलियां भी उठने लगीं हैं। लोगों का कहना है कि जब शारदा नदी से अवैध खनन रोक लगाई जा चुकी है तो नेपाल की मछली की टाइगर रिजर्व के रास्ते भारतीय क्षेत्र में कैसे तस्करी हो रही है? बताते हैं कि इस अवैध धंधे में कुछ सफेदपोश लिप्त हैं।
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नदी के घाटों की नीलामी भी तस्करी को दे रही बढ़ावा
टाइगर रिजर्व हर साल शारदा नदी के अपने घाटों की नावों के संचालन के लिए नीलामी करता है। यह आम लोगों को आवागमन की सुविधा के लिए की जाती है, लेकिन इसका फायदा तस्कर उठाते हैं। इन घाटों से नेपाल से डीजल, नशीले पदार्थों ओैर भारतीय क्षेत्र से खाद और लकड़ी की तस्करी होती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो टाइगर रिजर्व बनने के बाद घाटों का नीलामी करना भी एक तरह से तस्करी को बढावा देने जैसा ही है। अब तो टाइगर रिजर्व की वन भूमि पर खेती करने वाले माफिया भी खुली सीमा होने का फायदा उठाकर गन्ने की नेपाल को तस्करी कर रहे हैं।
सांठगांठ के चलते फल फूल रहा तस्करी का धंधा
सीमावर्ती गांवों के लोगों का कहना है कि जब रेत खनन रोका गया तो अवैध मछली शिकार और अन्य चीजों की तस्करी पर भी अंकुश लगना चाहिए। खास बात ये है कि टाइगर रिजर्व ने रमनगरा और कंजरिया घाट तो नीलाम किया है, लेकिन कंजरिया घाट की आड़ में तस्करी के लिए मझारा घाट भी चलाया जा रहा है। बताते हैं कि टाइगर रिजर्व के वन कर्मियों ने मझारा घाट को एक बड़ी रकम लेकर अवैध संचालन की छूट दे रखी है। जिससे पशुओं की भी तस्करी की जा रही है। कुल मिलाकर टाइगर रिजर्व का जंगल तस्करों के लिए खासा मुफीद साबित हो रहा है। वहीं जिम्मेदारों से तस्करों की साठगांठ भी इस अवैध धंधे को दिन दूनी रात चौगनी तरक्की देती नजर आ रही है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार चौकसी बरती जा रही है। शारदा नदी के पार लग्गाभग्गा क्षेत्र में हर गतिविधि पर नजर रखने को वनकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही घाटों के रास्ते से कोई अवैध व्यापार न हो सके, इसके लिए लगातार पेट्रोलिंग भी की जा रही है। - वजीर हसन, प्रभारी क्षेत्राधिकारी, बराही
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