बरखेड़ा (पीलीभीत)। चार साल से मानसिक रूप से बीमार चल रही 35 वर्षीय मोतिका देवी ने परिवारीजनों की गैर मौजूदगी में खुद को कमरे में बंद कर मिट्टी का तेल छिड़क आग के हवाले कर दिया। मकान से धुआं निकलता देख मौके पर पहुंचे आसपास के लोगों ने दरवाजा तोड़कर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिवारीजनों ने कानूनी कार्रवाई से इनकार किया है। इसकी सूचना भी पुलिस को नहीं दी गई है। उधर घटना को लेकर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के कुंदनपुर निवासी टीकाराम ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी मोतिका देवी की शादी 16 साल पहले पंडरी खमरिया गांव निवासी पर्सपाल से की थी। जिससे उसको तीन बच्चे मुकेश (14), भरतवीर (12) और छह साल की बेटी विनीता है। शादी के कुछ दिन बाद से दंपति कुंदनपुर में मकान बनवाकर रहने लगे। चार साल से मोतिका देवी मानसिक रूप से बीमार चलने लगी। उसका बरेली के एक अस्पताल से इलाज कराया जा रहा था। शनिवार सुबह पति व्यापार के सिलसिले में फल खरीदने के लिए पीलीभीत आ गया। उधर तीनों बच्चे स्कूल चले गए। दोपहर में महिला ने आत्मघाती कदम उठा लिया। खुद को कमरे में बंद कर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली। आसपास के लोगों ने मकान से चीख पुकार की आवाज और धुआं निकलता देखा तो मौके पर भीड़ जमा हो गई। किसी तरह लोगों ने दरवाजा तोड़कर भीतर घुसे और आग बुझाई, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। इसकी सूचना मिलने पर परिवारीजन भी आ गए। जिसके बाद कानूनी कार्रवाई से इनकार करते हुए शव के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई।