पीलीभीत। अफसर भले आए दिन थानाध्यक्षों को ड्यूटी के प्रति गंभीरता लाने के सख्त दिशा निर्देश दे रहे हों, लेकिन धरातल पर पुलिस का रवैया बेहद लापरवाह बना हुआ है। निरंजनकुंज कॉलोनी में चोरी करने के शक में पब्लिक द्वारा पकड़ा गया नाबालिग 12 घंटे से अधिक समय तक कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहा। तहरीर भी एक पक्ष की ओर से कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को दी गई, लेकिन शहर कोतवाल देशपाल सिंह दूसरे दिन भी इसको झुठलाने में जुटे रहे। नाबालिग के पकड़े जाने की बात से ही इनकार कर दिया। हालांकि बाद में सच्चाई सामने आने पर फजीहत हुई तो साख बचाने में जुट गए।
रविवार देर शाम निरंजनकुंज कॉलोनी में चोरी के शक में एक नाबालिग को भीड़ ने धर दबोचा था। जबकि उसका साथी भागने में सफल रहा। इसकी सूचना मिलन पर यूपी 100 पुलिस मौके पर पहुंची और पकड़े गए नाबालिग को रात में ही कोतवाली पुलिस के सपुर्द कर दिया गया। कॉलोनी के बुद्धसेन सागर ने भी चंद मिनट बाद ही कोतवाली पुलिस को कानूनी कार्रवाई के लिए तहरीर दी। नाबालिग रविवार की रात से लेकर सोमवार दोपहर तक कोतवाली में रहा। थाना स्टाफ उससे पूछताछ कर दूसरे साथी के बारे में जानकारी करता रहा। एक तरफ नाबालिग ने 12 घंटे कोतवाली पुलिस की हिरासत में बिताए। उसके परिवारीजन भी पुलिस से बेटे को छोड़ने की गुहार लगाने को चक्कर लगाते रहे। इस सब के बावूजद मंगलवार को कोतवाल नाबालिग के पकड़े जाने को गलत बताने में जुटे रहे। नाबालिग पकड़कर कोतवाली आया, इसको भी झुठलाना शुरू कर दिया। बाद में स्टाफ के हामी भरने पर कोतवाल ने साख बचाने को बेबाक बयानबाजी शुरू कर दी। जानकारी न होने के पीछे दोनों पक्षों में सुलह के बाद नाबालिग के छूटने को कारण बता डाला। यही नहीं पकड़े गए किशोर को बेगुनाह भी बताने लगे। ऐसे में सवाल यह है कि अगर किशोर बेगुनाह था फिर पुलिस उसको एक अपराधी की तरह कोतवाली में घंटों क्यों बैठाए रही? मामले में भले कानूनी कार्रवाई न हुई हो, लेकिन कोतवाली पुलिस का लापरवाह रवैया जरूर उजागर हो गया है।