पीलीभीत। कृषि कार्य के लिए लिमिट बनवाने बैंक गए किसान से जालसाजों ने कई अभिलेखों पर हस्ताक्षर करा लिए। किसान से उसके और उसकी पत्नी के फोटो भी ले लिए और फिर 15 दिन में बारह साला सर्टिफिकेट मुहैया कराने का भरोसा देकर वापस भेज दिया। इसके बाद उन्हीं अभिलेखों की मदद से बैंक प्रबंधक से सांठगांठ कर लाखों का लोन निकाल लिया। करीब ढाई साल बाद बैंक ने किसान से वसूली के लिए कलीनगर तहसील के लिए आरसी भेजी तो किसान के पास नोटिस पहुंचा, तब उसे इस धोखाधड़ी की जानकारी हुई। दो नोटिस में उस पर मय ब्याज 23.73 लाख रुपया बकाया बताया गया है। एसपी के आदेश पर मामले में तत्कालीन बैंक प्रबंधक समेत तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव धरमंगदपुर निवासी किसान प्रीतम सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि जून, 2016 में वह कृषि कार्य के लिए बैंक से लिमिट बनवाने के लिए सुरभि कॉलोनी निवासी रविंद्र पाल सिंह के पास गए थे। इस दौरान उन्होंने 12 साला सर्टिफिकेट 15 दिन बाद ले जाने की बात कही। उनके और पत्नी के कई कागजात पर हस्ताक्षर करा लिए गए, फोटो भी ले लिए। इंडियन बैंक के तत्कालीन प्रबंधक के अलावा रविंद्र का साथी गजरौला के पौरखास निवासी सतनाम सिंह भी इसमें शामिल था। कुछ दिन चक्कर लगवाने के बाद उनको टरका दिया गया। इसके बाद पीड़ित से लिए गए अभिलेखों के सहारे आरोपियों ने उनकी जमीन और ट्रैक्टर पर लाखों का लोन निकाल लिया। करीब सात दिन पूर्व तहसीलदार कलीनगर की ओर से दो आरसी नोटिस उनको प्राप्त हुए। इनमें एक 12 लाख और दूसरा 11.73 लाख रुपये का है। इसको लेकर जानकारी की गई तो पता लगा कि उनके ट्रैक्टर और जमीन पर बैंक से लोन लिया गया है, जबकि प्रीतम सिंह ने कोई लोन ही नहीं लिया था। तत्कालीन शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से आरोपियों ने जालसाजी कर लोन निकाल लिया। प्रीतम ने इसकी शिकायत एसपी से की। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी रूम सिंह बघेल ने बताया कि प्रीतम सिंह की ओर से तत्कालीन शाखा प्रबंधक इंडियन बैंक समेत रविंद्र पाल सिंह और सतनाम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसकी जांच एसआईटी टीम करेगी।