पीलीभीत। आठ साल के बच्चे की गर्दन पर चाकू रखकर धार्मिक नारा बुलवाने की सूचना फैलाकर शहर की फिजा बिगाड़ने की कोशिश करने के मामले में पुलिस अधिकारी भले कोई जांच नहीं कर सके हो, लेकिन प्रकरण को लेकर खुद फंसती जा रही महिला सिपाही हिना अब्बास ने अपना पक्ष रखा है। जिसके बाद कोतवाली की खकरा चौकी पुलिस और यूपी 100 की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए है। खास बात है कि सांप्रदायिक मामले से जुड़ी सूचना पर जाकर वापस आने के बाद भी उन्होंने अफसरों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी? यह सवाल भी लापरवाही को उजागर करता है।
हिना अब्बास नाम की एक महिला सिपाही ने मंगलवार रात शहर के एक बारात घर के बाहर आकर लोगों को बताया था कि उसे सूचना दी है कि कुछ लोग एक आठ साल के बच्चे की गर्दन पर चाकू रखकर उससे धार्मिक नारा लगाने का दबाव बना रहे है। महिला सिपाही के बिना वर्दी होने के कारण बारात घर में लोग उससे उलझने लगे। इसकी सूचना मीडिया के अलावा सिपाही ने एक धर्म गुरु को भी दी। इससे तनाव की स्थिति बनी, लेकिन संभ्रात लोगों ने सूझबूझ से मामला शांत करा दिया। मौके पर लोगों ने ऐसी घटना से अनभिज्ञता जताई। जिसके बाद महिला सिपाही पर फिजा बिगाड़ने की कोशिश करने के आरोप लगे। अफसरों ने जांच कर कार्रवाई के बयान दिए, लेकिन दूसरे दिन भी कोई जांच नहीं की जा सकी। जिससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इतना जरूर महिला सिपाही ने घटना को लेकर अपना पक्ष रखा है। उसने बताया कि उसको एक असलम नाम के व्यक्ति ने फोन पर सूचना दी। जिस पर वह खुद ही ऑन ड्यूटी न होने के बाद भी मौके पर गई, लेकिन लोग उसे पुलिस वाला नहीं माने और उलझ गए। इसके बाद खकरा चौकी जाकर इसकी शिकायत की। यूपी 100 को भी कॉल की गई, लेकिन पुलिस ने इसको गंभीरता से नहीं लिया। महिला सिपाही ने खुद पूरे मामले में चौकी व यूपी 100 पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद अफसरों की नजर अंदाजगी के चलते पूरा मामला सुलझने के बजाए उलझता जा रहा है। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि आज मीटिंगों को लेकर मामले की जांच नहीं हो सकी है। शुक्रवार को पूरे प्रकरण को दिखवाया जाएगा।