शहर में अकेले मंडी समिति में ही 50 से ज्यादा गोवंश, खानापूूर्ति के लिए गोशालाओं में क्षमता से अधिक ठूंसे पशु
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद गोवंश को संरक्षित करने के लिए अधिकारियों ने ऐसी कागजी खानापूर्ति की कि कागजों में गोवंश की संख्या महज 137 रह गई। जबकि यहां हर सड़क पर गोवंश घूमते देखे जा सकते हैं। अकेले शहर की मंडी समिति में ही 50 से ऊपर गोवंश हैं। छुट्टा पशुओं से होने वाली घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में डीएम को निर्देश जारी करते हुए 31 मार्च तक पशुओं को संरक्षित करने के लिए कहा था। बाद में समय सीमा 5 अप्रैल तक बढ़ा दी गई थी। शासन के इस आदेश पर विभागीय अफसरों ने ऐसा खेल किया कि बिना गोशालाओं का निर्माण किए ही पहले से क्षमता से अधिक पशुओं का भार झेल रहे आश्रय स्थलों में उनको ठूंस दिया।
महज 20 दिन के भीतर 1500 से अधिक पशुओं को संरक्षित करने का दावा किया गया। दावा था कि सिर्फ 137 गोवंश ही संरक्षित होने से रह गए हैं। इधर, क्षमता से ज्यादा गोवंश ठूंसे जाने से गो आश्रय स्थलों की भी हालत खराब हो गई। यहां बता दें कि दो नए बने आश्रय स्थलों को छोड़कर जिले के 47 आश्रय स्थलों में 2824 गोवंश रखने की क्षमता है। इसके सापेक्ष अब इन आश्रय स्थलों में करीब पांच हजार गोवंश हैं। देवीपुर की 350 की क्षमता वाली गोशाला में एक हजार गोवंश रखे गए हैं। ऐसे में खुद ही समझा जा सकता है कि यहां क्या हाल होगा।
आठ गोशालाएं का निर्माण अब भी अधूरा
गोवंश को संरक्षित करने के लिए जिले में 12 गोशालाओं का निर्माण मनरेगा की ओर से शुरू किया गया था। इसमें दो माह में मात्र चार का ही निर्माण हो सका। यहां पर 50-50 पशुओं को रखने की बात कही जा रही है। आठ का निर्माण अब भी पूरा नहीं हो सका है।
तीन गोशालाओं को विस्तारित करने का दावा
पशुपालन विभाग की ओर से जिले की तीन गोशालाओं को विस्तारित करने का दावा किया जा रहा है। इसमें माधोटांडा क्षेत्र की परशुरामपुर गोशाला की क्षमता 40 से बढ़ाकर 80, बसंतापुर की 50 से बढ़कर 87 और हरैया की 50 से बढ़ाकर 74 गोवंश रखनेे की बात की जा रही है।
पूर्व में जिले में निराश्रित गोवंश- 1700
जिले में आश्रय स्थल- 49
आश्रय स्थलों की क्षमता- 2824
आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश- 4963
निराश्रित गोवंश- 137
नए आश्रय स्थल बने- 04
विस्तारीकरण हुआ- 03
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जिले में अब मात्र 137 गोवंश ही शेष रह गए हैं। उनको भी गोशालाओें में भिजवाया जा रहा है। गोशालाओं का विस्तारीकरण किया गया है। चार नई गोशालाएं भी बन चुकी हैं।
- डॉ. अरविंद गर्ग, सीवीओ