इसके बाद उसने पुलिस को फोन किया। पुलिस ने पोर्ट दर्जकर मामले की जांच की। इसके बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कई गवाह न्यायालय में पेश किए। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने एवं पत्रावली का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी पाते हुए 2500 रुपये अर्थदंड व तीन वर्ष की सजा सुनाई है।